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शनिवार, 2 फ़रवरी 2019

मोहब्बत का तलाक


रीमा और राहुल दोनो ही मिडिल क्लास परिवार से आते थे। रीमा का पढाई में तो राहुल को ऐक्टिंग में रुझान था, मगर राहुल के पिता चाहते थे कि उनकी ही तरह उनका बेटा किसी सरकारी नौकरी में लग जाय। कालेज में ही रीमा और राहुल एक दूसरे से मिले और फिर जान पहचान दोस्ती और दोस्ती मोहब्बत में बदल गयी। दोनो ही परिवारों को उनके इस सम्बन्ध पर शुरु शुरु में ऐतराज तो हुआ जितना एक माता पिता को होना ही चाहिये, मगर धीरे धीरे उन्होने इस रिश्ते को स्वीकृति दे दी। राहुल के पिता चाहते थे कि राहुल का विवाह नौकरी के बाद हो, और ऐसा ही कुछ विचार रीमा के परिवार वालों का भी था। मगर राहुल के कुछ और ही सपने थे, और उसके इन सपनों को साकार करने में रीमा पूरी तरह उसके साथ थी। बडी मुश्किल से वह दोनो अपने बडों को यह समझाने में कामयाब हुये कि राहुल को दो साल का समय दिया जाय, अगर वह अपने सपने पूरे करने में सफल नही हुआ तो वह वापस आकर पिता जी की बात मान लेगा, रीमा के पिता भी दो वर्ष तक रीमा का विवाह कही और न करने के लिये राजी हो गये।
पूर्ण सहमति न होते हुये भी सभी ने खुशी और आशीर्वाद के साथ राहुल को मुम्बई भेज दिया इधर रीमा ने पीसीएस की तैयारी करने का निर्णय यह सोच कर लिया कि अब वह राहुल के पिता के सपने को  पूरा करेगी।
राहुल की मेहनत रंग ला रही थी, उसे थोडा बहुत काम मिलने लगा था, मगर उसे अभी और समय चाहिये था, रीमा ने उसे आश्वस्त किया कि वह हमेशा उसके साथ है।
धीरे धीरे चार वर्ष बीत गये, राहुल को एक फिल्म में लीड रोल मिला था, बस उसे फिल्म की रिलीज का इन्तजार था, इधर रीमा ने भी पी सी एस का इन्टरव्यू दिया था।
मेहनत और बडों का आशीष रंग लाया। परिवार के लोग बच्चों की सफलता और लगन से खुश थे, अब उनकी शादी और टालने का कोई कारण नही था। रीमा और राहुल एक बन्धन में बंध कर खुश थे, दुनिया की हर खुशी उन्हे मिल गयी थी।
समय और सपनों की अपनी ही एक चाल होती है, ख्वाब एक ऐसी चीज है जो कभी मुकम्मल नही होते क्योकि सोच उसमें गुणा भाग करती ही रहती है। रीमा की जॉब और राहुल के काम ने दोनो को एक छत के नीचे रहने की इजाजत नही दी। शुरु शुरु में दोनो ने इसे मैनेज करने की बहुत कोशिश की मगर जहाँ से हम जिन्दगी को मैनेज करना शुरु कर देते है दरअसल जिन्दगी वही से टूटना शुरु हो जाती है। मोहब्बत को मैनेजमेंट नही समर्पण की जरूरत होती है। प्यार के कहकहे धीरे धीरे आर्गूमेण्ट्स और फिर आरोपों तक पहुंचने लगे। दोनो ही कल तक जिन खूबियों पर एक दूसरे पर जान देते थे आज उन्ही को खामियां बता रहे थे। सात सालों का रिश्ता सिसक रहा था,जिस रिश्ते की बुनियाद मोहब्बत थी आज वही नेस्तेनाबूद थी। 
राहुल और रीमा जिन्होने एक दिन अपने परिवार वालों को हजार तरीकों से समझाया था कि वह एक दूसरे के लिये ही बने हैं आज कोर्ट में खडे होकर एक दूसरे से अलग होने के लिये दलीले दे रहे थे वो राहुल जो रील लाइफ का सफल नायक था रियल लाइफ में अपनी मोहब्बत बचाने में असफल था, रीमा जो  अपाने विभाग में सफल एड्मिनिस्ट्रेटर थी अपनी ही जिन्द्गी को एड्मिन नही कर सकी थी। और परिवार वाले किसी भी भूमिका में नही थे। न वह उन्हे एक होने से रोक सके थे न ही अलग होने के फैसले को रोक सके थे।
भले ही दुनिया की नजर में, रीमा और राहुल अलग हो गये थे मगर मेरी निगाह में यह मोहब्बत का तलाक था। 

शनिवार, 19 जनवरी 2019

गुलाबी इश्क के पन्ने



वो महीन गुलाबी
इश्क के पन्ने
और उन पर लिखी
मोहब्बत की आयतें
बेशकीमती हीरे सी
रखी है सहेज कर
यादों की रुमाली
चादर की तहों में
वो पन्ने जिनमें
अल्फाज नही
लिखे हैं सिर्फ
नर्म गर्म अहसास
हर दिन पढती और
लिखती रहती हूं`
कुछ न कुछ
तुम्हारी ही जबान में
सच कितना आसान होता है
बयां करना 
मन में उमडते जज्बात
अहसासों की जुबां मे
एक और बडी प्यारी सी 
खूबसूरती है इसमें
नही करना होता 
किसी को इन्तजार
किसी के चुप होने का
न कोई गुंजाइश होती
ना समझी की
ना ही आडे आती है
लफ्जों की दीवार
दोनो खमोशी से
एक ही पल में
कहते सुनते और 
लिखते रहते हैं
गुलाबी इश्क के पन्ने
अहसासों की जुबानी

रविवार, 2 दिसंबर 2018

बडा आदमी



बचपन से एक ही सपना था, बडा होकर विदेश जाऊंगा, खूब पैसा कमा कर मै भी बडा आदमी बनूंगा।बचपन से बडा होने तक बहुत कुछ सीखा, बहुत कुछ बदला मगर बडा आदमी बनने की परिभाषा नही बदली। और इसी ललक ने मुझे विदेश में अच्छी नौकरी अच्छा पैसा दिलाया। आज जब यदा कदा अपने देश वापस आता हूँ तो लोगो की आंखो में जो अपनी छवि दिखाई देती है, वो अहसास दिला जाती है कि मै अब थोडा थोडा बडा आदमी बन रहा हूँ। इस बार वापसी के समय माँ बाबू जी की आंखों में मै साफ साफ पढ रहा था कि बेटा बहुत बन लिये बडे आदमी कुछ दिन इन बूढी हड्डियों के लिये बडे बेटे बन जाओ, मगर वापस आते आते और बडे बनने की धुन के सामने बहुत जल्दी वो अनकहे शब्द धुंधले पड गये। धीरे धीरे जीवन फिर से रफ्तार पकड चुका था, दिसम्बर का फर्स्ट वीक चल रहा था, बहुत सारा काम निपटाना था क्योंकि फिर लम्बी छुट्टियां थी, आज सुबह से काम में व्यस्त था, थोडा सर मे भारीपन सा महसूस कर रहा था सो डेविड को काम आगे कन्टून्यू करने को बोलकर मै कैंटीन चला गया। आज मधुर छुट्टी पर था सो अकेले ही चाय का कप ले एक कार्नर सीट पर बैठ गया। तभी कुछ दूर पर बैठे लोगो की बातें जो अस्पष्ट थी सुनाई दी, वो कह रहे थे-
अच्छा ही किया सरकार ने, जो योग्यता के आधार पर दूसरे लोगो को अपने देश में नही रुकने देगें, अब तो बहुत से लोगों को जाना ही होगा, वैसे भी ये लोग सिर्फ पैसा कमाने यहाँ आते है, दूसरे ने बोला- यार ये बताओ इंडिया में योग्य लोगों को पैसा कमाने के साधनों की कमी है क्या? तभी एक अन्य बोला- मुझे तो लगता है इन लोगो को अपने यहाँ इज्जत तभी मिलती है जब ये हमारे देश में काम करते हैं। और यार इसमें अपना और अपने देश का ही तो फायदा है, यहाँ टिके रहने के लिये ये और मेहनत करेंगे, और हमारे देश की और तरक्की होगी। तभी पहला वाला बोला- ह्म्म वो तो है मगर सोचो कि जो लोग यहाँ से निकाले जायेंगे उन्हे न तो उनके देश में पैसा मिलेगा न इज्जत, जिसके लिये बेचारे सब छोड कर आते है और बस अपनी तसल्ली के लिये बोलते रहते है आई लव माई इंडिया, हाउ पुअर दीस पीपुल, और कह कर सब हंसने लगे। मै चाह कर भी उन्हे कोई जवाब नही दे पा रहा था, क्योकि मै खुद कुछ समय से इसी डर में जी रहा था कि क्या इस देश के हिसाब से मै योग्य व्यक्ति हूं या या किसी भी दिन अयोग्य साबित कर निकाल दिया जाऊंगा।
मगर चाय खत्म करते करते मैं यह समझ पा रहा था कि बडा आदमी बनने की जो परिभाषा मैने समझी थी वो कितनी गलत थी, चाय का कप टेबल पर छोडते हुये मैंने निश्चय कर लिया था कि अब मुझे माता पिता का बडा बेटा और अपने देश के लिये बडा आदमी बनना है।



मंगलवार, 27 नवंबर 2018

वो फरिश्ते कम ही होते है.........


बहुत दूर तलक साथ दे,
वो रिश्ते कम ही होते हैं
औरों के लिये भी जियें
वो अपने कम ही होते हैं

दिखती तो हैं कई चेहरों में
कुछ अपनेपन की फिकर
बिन कहे दर्द दिल के सिये
वो अपने कम ही होते है

धूम करने को महफिल में
बहुत से है तराने, लेकिन
बुझे दिल की रौशनाई बने
वो नगमे कम ही होते हैं

जी कर भी तमाम उम्र
तलाश अधूरी सी, अबतक
मुकम्मल जिन्दगी कर दे
वो लमहे कम ही होते हैं

कामयाबी पे मिलते है गले
बेगाने भी अपनो की तरह
सख्त राहों में हमकदम बने
वो फरिश्ते कम ही होते है
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