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बुधवार, 14 जुलाई 2010

बदलती हवायें

 

युग बदले मौसम बदले
बदले इंसानों के चेहरे
धर्म और कर्म रहे मगर
आस्थाएं और वजहें बदल गयी
 हवाओं की ठंडक बदल गयी
लू की तपिश भी बदल गयी
सलोने से बसन्त की 
तरुणाई भी है बदल गयी
रिश्ते और नाते है अब भी
निभाने के तरीके बदल गये
शब्दकोष तो रहा वही
बस उच्चारण बदल गये 
शिष्टाचार रहा प्रतिदिन का
पर परिभाषायें बदल गयी
त्याग और्र विश्वास की
सारी सीमायें बदल गयी
परिवर्तन करते करते
हम इतने परिवर्तनशील हुये
कि मौसम के बदलने के 
रास्ते भी सारे बदल गये 

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