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रविवार, 11 सितंबर 2011

कभी- कभी तन्हाई भी भाती है .........


कभी कभी अकेलेपन का ,साथ भी मन को भाता है ।
तन्हाई में ही तो मन ,दिल की कही सुन पाता है ॥

एकान्त में इक अलग से, सुकून का अनुभव होता है । 
ऐसे में ही तो मन अपनी, अच्छाई बुराई गिन पाता है ॥

कुछ ऐसे पल जब हम, बस खुद के लिये जीते है ।
समझ आता है मन को कि, मेरा मुझसे भी इक नाता है ॥

कितने अनसुलझे रहस्यों की, ग्रन्थियां खुद-ब-खुद खुल जाती है ।
जीवन की नदिया को अक्सर, इक नया आयाम मिल जाता है ॥

उलझे से मन की हर इक, धुंधली धुंध तब छट सी जाती है ।

बीता वक्त चुपके से आ, जीवन का नव-स्वप्न बुन जाता है ॥

कभी कभी अकेलेपन का , साथ भी मन को भाता है ।
तन्हाई में ही तो मन , दिल की कही सुन पाता है ॥

35 टिप्‍पणियां:

  1. कभी कभी अकेलेपन का ,साथ भी मन को भाता है ।
    तन्हाई में ही तो मन , दिल की कही सुन पाता है ॥


    भावनाओं को बहुत सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है .....वह यह तन्हाई जो हमें खुद से मिलने का अवसर तो देती है .......आपका आभार

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  2. तन्हाई का अर्थ है जब हम केवल अपने साथ होते है सुंदर भाव बधाई

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  3. अपर्णा जी, इतनी गहरी बात आपने इतने आसान लफ्जों में कह दी। यकीन ही नहीं होता।

    ------
    क्‍यों डराती है पुलिस ?
    घर जाने को सूर्पनखा जी, माँग रहा हूँ भिक्षा।

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  4. कितने अनसुलझे रहस्यों की,
    ग्रन्थियां खुद-ब-खुद खुल जाती है ||

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||
    आपको बहुत बहुत बधाई |

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  5. लगता है जैसे मेरे मन की ही बातों को आपने खूबसूरत शब्द दे दिये हों। बेहद पसंद आई यह कविता।
    ---------
    कल 13/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  6. कभी कभी अकेलेपन का ,साथ भी मन को भाता है ।
    तन्हाई में ही तो मन ,दिल की कही सुन पाता है ॥ बहुत ही खुबसूरत....

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  7. tanhayi hi to sabse bada sathi hoti hai .......bahut sundar bhav.

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  8. भावनाओं को बहुत सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है|धन्यवाद|

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  9. समझ आता है तब मन को, की मुझसे मेरा भी एक नाता है ...वाह बहुत ख़ूब ....
    समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  10. बहुत खूबसूरत और प्रेम पगी रचना ..

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  11. बड़ी खूबसूरती से शब्द दिए...सुन्दर भाव..बधाई.

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  12. बड़ी खूबसूरती से शब्द दिए...सुन्दर भाव..बधाई.

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  13. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  14. वाकई ...कभी कभी अकेलापन बहुत अच्छा लगता है !

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  15. कभी अकेलापन भाता है, बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ।

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  16. बहुत ही अच्‍छी रचना ... भावमय करते शब्‍द ।

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  17. तन्हाई पर लिखी बहुत सुंदर और अनोखी रचना बहुत बहुत बधाई आपको /अकेलेपन का साथ भी कभी कभी सबको भाता है और अपने अन्दर झाँकने का मोका भी मिल जाता है /



    please visit my blog
    www.prernaargal.blogspot.com

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  18. खूबसूरत भावो से ओतप्रोत बहुत सुन्दर भावभिव्यक्ति....बधाई....

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  19. कभी कभी अकेलेपन का ,साथ भी मन को भाता है ।
    तन्हाई में ही तो मन ,दिल की कही सुन पाता है ॥
    .मनो -विश्लेषण परक रचना ,आत्मा लोचन कराती ,खुद का खुद से संवाद ,मेल मिलाप कराती ...http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2011/09/blog-post_13.हटमल
    अफवाह फैलाना नहीं है वकील का काम .

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  20. कभी -कभी अकेलापन बहुत भाता है ......

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  21. सचमुच... तन्हाई भी भाती है...
    बढ़िया प्रस्तुति....
    सादर...

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  22. बहुत सही कहा आपने...

    एकांत में ही व्यक्ति अपने साथ हो पाता है...और जबतक अपना साथ न हो,व्यक्ति स्वयं को पहचानेगा कैसे....

    बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति.....

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  23. में और मेरी तन्हाई , अक्सर ये बातें करते हैं ....

    कभी कभी अकेलेपन का ,साथ भी मन को भाता है ।
    तन्हाई में ही तो मन ,दिल की कही सुन पाता है ॥


    एकान्त में इक अलग से, सुकून का अनुभव होता है ।
    ऐसे में ही तो मन अपनी, अच्छाई बुराई गिन पाता है ॥


    कुछ ऐसे पल जब हम, बस खुद के लिये जीते है ।
    समझ आता है मन को कि, मेरा मुझसे भी इक नाता है ॥

    बहुत सुंदर रचना ....

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  24. तन्हाइयां बहुत कुछ कह जाती हैं तन्हाई में ही अक्सर ...

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  25. कभी कभी अकेलेपन का , साथ भी मन को भाता है ।
    तन्हाई में ही तो मन , दिल की कही सुन पाता है ॥

    .....बहुत सच कहा है...बहुत ज़रूरी है कभी तन्हाई के स्वर भी सुनना...बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति..

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  26. साढ़े छह सौ कर रहे, चर्चा का अनुसरण |
    सुप्तावस्था में पड़े, कुछ पाठक-उपकरण |

    कुछ पाठक-उपकरण, आइये चर्चा पढ़िए |
    खाली पड़ा स्थान, टिप्पणी अपनी करिए |

    रविकर सच्चे दोस्त, काम आते हैं गाढे |
    आऊँ हर हफ्ते, पड़े दिन साती-साढ़े ||

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  27. अकेलेपन में इंसान खुद के पास होता है..अच्छे से समझने का मौका मिलता है खुद को!!

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  28. आप सब को विजयदशमी पर्व शुभ एवं मंगलमय हो।

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  29. अरे बन के निर्मल निर्झर

    इस एकांत शांत प्रान्गड़ में किसे सुउनाते सुमधुर स्वर

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