वो कहता था
वो कभी झूठ नही बोलता
किसी को धोखा नही देता
वादे निभाना है उसकी आदत
इश्क को मानता है इबादत
वो कहता था
मेरा इन्तजार करना
मुझपे ऐतबार करना
मै बसता हूँ तेरे दिल में
मुझे कभी बेघर ना करना
वो कहता था
मै चाहे कही भी जाऊँ
कितना भी दूर रहूँ
पर आऊँगा लौट कर
ना जाना मुझे छोड कर
आज भी मै कर रही हूँ
उसका इन्तजार
क्योकि उसने किया था
मुझपे ऐतबार
नही बसाया है किसी को
अपने दिल में
क्योकि नही कर सकती
उसको बेघर
खडी हूँ आज भी
मै उसी मोड पर
बरसो पहले जहाँ
गया था छोड कर
जाने किस पल
वो आ जाय
मुझे ना पाकर
कही घबरा ना जाय
बस चाहती हूँ
एक बार सिर्फ एक बार
आ जाय मेरे पास
कह दे एक बार
तुम क्या चाहती हो
क्योकि हमेशा
वो कहता रहा
बस कहता रहा
और मै सुनती रही
कह ना सकी कभी
मन की बात
वरना आज
वो भी कही
किसी से कहता
वो कहती थी …………..



