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सोमवार, 1 अप्रैल 2013

मै कौन हूँ ????




कभी अधूरी प्यास हूँ , कभी खामोश आवाज हूँ ,
कभी धूल मै राहों की , कभी  गीत का साज हूँ

कभी किसी का राज हूँ , कभी किसी का नाज हूँ ,
कभी अनबुझ पहेली हूँ कभी तडपती बात हूँ

कभी आइने सी साफ हूँ , कभी पाकीजा आग हूँ ,
कभी मैं शीतल छाया सी ,कभी प्रतीक्षित सौगात हूँ

कभी बहता झरना हूँ, कभी जंजीरों मे जकडी हूँ,
कभी सुहाना मौसम हूं , कभी मचलती बरसात हूँ

कभी तन्हा जीवन हूँ , कभी महफिल की शान हूँ
कभी हंसी सुबह हूँ तो , कभी बिखरती रात हूँ

कभी रिवाजो की गठरी , कभी काठ की पुतली हूँ
कभी लाज शर्म की मूरत , कभी मै टूटी साख हूँ

कभी बोझ अपनो का हूँ , कभी अमानत परायी हूँ
कभी सिमट्ती धरती हूँ , कभी स्वच्छंद आकाश हूँ

बाबुल की चहेती गुडिया हूँ, खुद के लिये "पलाश" हूँ
पर सदा ही मै एक नारी हूँ, कभी आम कभी खास हूँ

रविवार, 26 अगस्त 2012

नारी - विश्व समाया है तुझमें



वो चूल्हे की आग में तपते हुये निखरता तेरा रूप
क्या मुकाबला कर सकेगी कोई विश्व सुन्दरी इसका
वो आँचल में बार बार लगना हल्दी, तेल, मसाले
बना देता है मामूली सी साडी में भी तुम्हे अप्सरा

तेरी मदमाती आँखों से लिपटता हल्का हल्का धुँआ
बना देता है और भी मदमस्त तेरे श्याम नयनों को
जब जब तेरे अधरों का स्पर्श पाती है टूटी फुकनी
मन देने लगता है उडान अपनी अधूरी कल्पना को

परोस कर लाती हो पसीने से लथपत चेहरा लिये थाली 
तेरी साधारण सी छवि में भी दिखता अलौकिक देवत्व
अपनी थकान को छुपाकर मुझे झलती हो जब झलना
पूजने लगता हूँ मन ही मन तेरा अनुपम व्यक्तित्व

जब जब देखता हूँ तुम्हे इक पहेली सी लगती हो तुम
तेरे एक कोमल से तन में बसे है ना जाने कितने रूप
बन जाती हो कभी तो तुम ममता की शीतल छाया
कभी तेजस्विनी ऐसी की फीकी पड जाती प्रचंड धूप


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