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रविवार, 21 अगस्त 2011

क्या आप सच में अन्ना हैं ??





१६ अगस्त को देश में एक क्रान्ति की शुरुआत हुयी , अन्ना जी ने आहवान किया और लोगो ने भरपूर समर्थन भी दिया । लाखों लोग आज यह कहते सुने जा सकते है कि " मै अन्ना हूँ "। मगर यह सुनकर मेरे मन में कई सवाल उठते है जिनके सटीक उत्तर शायद आप लोगों से ही मिल सके ....

यह लडाई क्या बिल के पास हो जाने से समाप्त हो जायगी ?

क्या वाकई में देश को नये बिल की जरूरत है ?

क्या एक बिल हमारी मनोवृत्तियां बदल देगा ?

क्या वो आम आदमी जो अन्ना जी के साथ होने का दावा कर रहा है , वो किसी भी मायने मे भ्रष्ट नही है ?

हम भ्रष्टाचार किसे मानते है - सिर्फ घूसखोरी , काला धन जोडना , धोटाला .... ?

क्या सच मे आज आम आदमी भ्रष्टाचार करना नही चाहता  ?

क्या हम ईमानदारी से कह सकते है कि हम ईमानदार हैं ?

सरकार हमसे कभी यह नही कहती कि हम भ्रष्टाचार करे , भ्रष्टाचार= भ्रष्ट + आचार । आचरण हमारी जीवन शैली है , हम कैसा व्यवहार करते है चाहे फिर वह परिवार के साथ हो समाज के साथ हो या देश के साथ । नियम कानून हमारे आचरण को कुछ हद कर रोक सकते है मगर हमारी सोच को नही बदल सकते । सोच स्वयं के निश्चय से बदलती है । आज हमे निश्चय की आवशयकता है , कोई हमे भ्रष्टाचार करने कि लिये मजबूर नही कर सकता जब तक हम खुद ना चाहे ।

हम खुद ही तो अपनी सहूलियतों के हिसाब से खुद को बदल लेते है , टिकट खिडकी पर जब आगे खडे है तो किसी को आगे नही आने देगें और अगर पीछे खडे है तो किसी भी तरह जल्दी टिकट लेने की कोशिश करते है ,तब सारे नियम भूल जाते है बस यही याद आता है कि कही ट्रेन ना छूट जाये ।
किसी आफिस मे अगर कोई काम कराना है तो सोचने लगते है कि कोई परिचित मिल जाये तो जल्दी काम करा लें ।

जनरल की टिकट ले कर स्लीपर में यह सोच कर बैठ जाते है कि टी . टी साहब को १०० - १५० दे देगें कभी नही सोचते की पेनाल्टी देगें ।

चार दिन की आफिस से छुट्टी ले लेते है यह सोच कर की ५० रुपये दे कर किसी डाक्टर से मेडिकल बनवालेगें

छात्र आये दिन पेपर आउट कराते है , क्या इसके लिये सरकार कहती है या देश का कानून कहता है

कितने लोग है जो ईमानदारी से टैक्स भरते है , कभी हमने सोचा हम क्यों ऐसा नही कर रहे ।

अन्त मे आखिरी सवाल हम देश में किसे आम आदमी मानते है ?? क्या खुद को देश का आम आदमी आप मानते है , यदि हाँ तो दो मिनट के लिये सोच कर देखिये क्या आप वाकई अन्ना है ? यदि नही तो क्यो ??
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