अक्सर लोगों को अपनी जिन्दगी से शिकायत रहती है कि उनको ये नही मिला, उनको वो नही मिला, उनको जो मिला, वो सही नही मिला, हमारा तो नसीब ही खराब है, वगैरह वगैरह । मगर यहाँ हम एक बात कहना चाहते है, कि मुकद्दर कोई पराई चीज नही जो हमको कही से मिल जाती है, ये वो चीज है जिसे हम खुद बनाते है, हम अपनी जिन्दगी से जो चाहे वो पा सकते है, जैसा चाहे वैसी अपनी तकदीर खुद लिख सकते है, तो फिर किसी भी बुरे के लिये कोई और नही हम स्वयं ही तो दोषी होते है, प्रकृति ने हमे सब कुछ दिया है, हम जैसे कर्म करते है, हमे परिणाम भी उसी के अनुरुप मिलता है , किसी ने कहा भी है -- " बोये पेड बबूल का तो आम कहाँ से होय"
अचछे कर्मो का प्रतिफल हमे अच्छी तकदीर के रूप में मिलता अवश्य है, हो सकता है कि जो आज हम अच्छा करे उसके सुखद परिणाम तुरंत ना मिले, मगर भविष्य में अन्तोगत्वा हमे सम्पन्नता और सुख मिलता अवश्य हैं......................
अचछे कर्मो का प्रतिफल हमे अच्छी तकदीर के रूप में मिलता अवश्य है, हो सकता है कि जो आज हम अच्छा करे उसके सुखद परिणाम तुरंत ना मिले, मगर भविष्य में अन्तोगत्वा हमे सम्पन्नता और सुख मिलता अवश्य हैं......................
सवंर जाऊँ, बिगड जाऊँ
मुकद्दर तो हमारा है
खुदी से है जहाँ अपना
बस हाथों का सहारा है
नही देती सदा ही साथ
हवायें शोख बाती का
उजाले दे, या बुझ जाये
मुकद्दर तो हमारा है ...............
नही होती सदा ही साथ
लहरें भी तो नैय्या के
लगा दे पार या डूबे
मुकद्दर तो हमारा है .................
खुशी और गम दोनो ही
खुदा के इस जहाँ मे है
मिले मुस्कान या आँसू
मुकद्दर तो हमारा है ................
