देश का सम्मान, उसकी प्रतिष्ठा किसी भी दल या पार्टी की कूटनीतियों या आपसी मनमुटाव से परे होना चाहिये। देश का प्रधानमंत्री देश का प्रतिनिधित्व करते हैं ना कि किसी पार्टी का और इसी लिये हम सभी की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि यदि वह देश हित के लिये कार्य करें और उसमें सफल भी हो तो हमे खुले दिल से इसका स्वागत करता चाहिये। यदि विश्व में वह देश की एक मजबूत राष्ट्र के रूप छवि बनाने में सफल हुये है तो निश्चित तौर पर यह उनके अथक प्रयासों का परिणाम है।
इस कविता के माध्यम से कुछ कहने की कोशिश की है........
कितना आसान है कह देना
आखिर उसमे रक्खा क्या है
किस्मत का है धनी बहुत
वरना वो करता ही क्या है
जिसका डंका बज रहा विश्व में
बाते जिसकी सुन रहे ध्यान से
कितनी आसानी से हम कह देते
आखिर वो कहता ही क्या है
रात दिवस का मिटा के अन्तर
देश की प्रगति मे लगा निरन्तर
कितनी आसानी से हम कह देते
आखिर वो करता ही क्या है
भाई भतीजा वाद ना मन में
जनहित ही बस उसके मन में
कितनी आसानी से हम कह देते
आखिर वो तजता ही क्या है
जाति धर्म दल से सोचो हट कर
विद्रोह न कर कठपुतली बन कर
आसानी से बस अब ना कह दो
देखो सोचो तो वो करता क्या है
