कुछ ख्वाब अधूरे हों पूरे,
कुछ नयी उम्मीदें पलें दामन में
कुछ बिगडी बाते बन जायें,
कुछ नये रिश्ते महके आंगन में
कुछ दर्द दिलों के राहत पायें,
कुछ प्रीत बिखरे आंचल में
कडवाहट कम हो नफरत की,
कुछ नये स्वर निकलें फिर पायल से
कुछ यूं आये नव वर्ष की सुबह,
जैसे नव वधू उतरी हो आंगन में
मन झूम उठे यूं खुशियों से,
जैसे मोर नांच उठता है सावन में
नूतन वर्ष का हर पल शुभ हो,
इतनी सी अभिलाषा है, इस दिल में