प्रशंसक

पीली सर्सों लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पीली सर्सों लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 23 जनवरी 2011

ओढे चूनर…………




नील गगन के तले धरा पर
पीली चादर सरसों की
ओढे चुनरिया मानो बिरहन 
राह निहारे प्रियतम की



सुध बुध खोई ,मगर ना खोई
आस अभी तक मिलने की ।
प्रभु के नाम सी जपती रहती 
माला वो तो  साजन की ॥
सता रही है बनकर बैरन
पवन ये देखो अगहन की
ओढे चूनर …………….

कह के गये थे आ जाओगे
तुम दो चार महीनों में ।
कसम भी ये दे कर गये थे
आँसू ना लाना नयनों में ॥
याद नही आती क्या तुमको
घर आँगन या बगियन की
ओढे चूनर…………


GreenEarth