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बुधवार, 10 जून 2020

हमेशा अच्छा नही लगता



हर चीज जगह पर होना, हमेशा अच्छा नही लगता
सलीकों में जिन्दगी जीना, हमेशा अच्छा नही लगता

कुछ आवारगी है जरूरी, मस्ती से जीने के लिये
अदबों लिहाज से रहना, हमेशा अच्छा नही लगता

कट कर तो गिरे पतंगें, किसी अजनबी की अटारी
उड के चूमना आसमान, हमेशा अच्छा नही लगता

हों थोडी सी लापरवाहियां, हों हिदायतें बुजुर्गों की
सधे कदमों से चलना, हमेशा अच्छा नही लगता

ओढ़ लो कभी यूं ही, बचपन की नासमझी
अकल का पैरहन, हमेशा अच्छा नहीं लगता

कुछ कच्चा पक्का बने, खाये कुछ मीठे से उलाहनें
उम्दा तारीफों का तडका, हमेशा अच्छा नही लगता

इन्तजार में महबूब, जरा पलकें तो बिछायें
वक्त पर पहुचना, हमेशा अच्छा नही लगता

कुछ नाराजगी भी हैं जरूरी मोहब्बत के लिये
हर बात मान जाना, हमेशा अच्छा नही लगता

8 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 11 जून 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. सादर नमस्कार,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार
    (12-06-2020) को
    "सँभल सँभल के’ बहुत पाँव धर रहा हूँ मैं" (चर्चा अंक-3730)
    पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है ।

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह, वाह!क्या बात है !बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह शानदार ग़ज़ल हमें अच्छा नहीं लगता..
    पर हमें बहुत अच्छी लगी आपकी ये उम्दा पेशकश।
    वाह!!

    जवाब देंहटाएं

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