इश्क़ की राह के, हमसफ़र हम भी हुये
तुम बने जो आसमान, चांद हम भी हुये
मुकम्मल हुए ख्वाब सारे, बाद एक मुद्दत के
रौशनीं में तेरी आज, आफताब हम भी हुये
चुभते रहे न जानिए, कितनों की निगाह में
आपने जो थामा हाथ , गुलाब हम भी हुये
गुज़र रहे थे आम से, रात दिन बेज़ार से
हुई निगाह तुमसे चार, ख़ास हम भी हुये
बुझे हुए चराग से, हुआ किये थे कल तलक
घुली जो मुझमें तेरी सांस, साज़ हम भी हुये

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