प्रशंसक

devotion लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
devotion लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 29 मई 2016

हर मौसम तेरा बनना है


मनमीत मेरे, साथ तेरे, कदम मिला कर चलना है
कभी धूप कभी छाँव बन, हर मौसम तेरा बनना है

जीने को तो जी लेते, बेंमतलब से इस जीवन को
कुछ रोते हसते पा ही लेते, आधे अधूरे सपने को
तेरी नजरों में बस कर , ख्वाब तुम्हारा बनना है
कभी धूप कभी छाँव बन, हर मौसम तेरा बनना है

कैसे बना दिल धीरे धीरे , तेरा दीवाना क्या जानूं
सोच लिया रस्मों रिवाज, दुनिया के मैं ना मानूं
अब हाथों में हाथ लिये, अरमान तुम्हारा बनना है
कभी धूप कभी छाँव बन, हर मौसम तेरा बनना है

मेरे प्यासे तन न पर, जब से पडी छाया तेरी,
खिल गयी मुरझाई कली, फूल बनी काया मेरी
तेरी सांसों को राग बना, संगीत तुम्हारा बनना है
कभी धूप कभी छाँव बन, हर मौसम तेरा बनना है
To watch video click on Palash the Name of Love
https://www.youtube.com/watch?v=xBdA8RaP9Kk

शुक्रवार, 1 मई 2015

प्रेम गीत


दे सकते है तुम्हे क्या, दिल लेके हम तुम्हारा
आज अपनी तमाम सांसे, तेरे नाम मै करती हूँ
इक बात अब तलक जो, तुमसे भी छुपाई है
कहती हूँ आज सबसे, तुमसे प्यार मै करती हूँ

पायल गहने कंगन मोती, सब झूठे से लगे है
अंखियों में ना रुके है , ये काजल भी अब तो
सोचती रहती हूँ हर पल बस, तेरे ही बारे मे
दर्पन मे तुम्ही तुम नजर आने लगे हो हमको
तेरी बेसब्र मोहब्बत का ही मै सिंगार करती हूँ
कहती हूँ आज सबसे, तुमसे प्यार मै करती हूँ

तुम पर ही जिन्दगी की, हर आस अब टिकी है
ना हो यकी जो हम पर, तो पूँछ लो मौसम से
परवाह नही हमको बेदर्द दुनिया की रस्मों की
मर जायेगे बिन तेरे , हम कहते है ये कसम से
दिन रात शामो सुबह तेरा इन्तजार मै करती हूँ
कहती हूँ आज सबसे, तुमसे प्यार मै करती हूँ

ना जाने क्या देखा, क्या पाया तेरी आंखों मे
फिर दिल ही ना चाहा, देखूँ और कोई सूरत
बरसों से थी तमन्ना इस दिल मे कोई आये
मिल कर लगा तुम्ही हो मेरे प्यार की मूरत
तन मन से तुम्हे अपना, स्वीकार मै करती हूँ
कहती हूँ आज सबसे, तुमसे प्यार मै करती हूँ

आज अपनी तमाम सांसे, तेरे नाम मै करती हूँ
कहती हूँ आज सबसे, तुमसे प्यार मै करती हूँ

शनिवार, 14 मार्च 2015

बेचैन ऩज्म


फूलों को रहने दूं शाखों पे
या गूंथ दूं तेरी जुल्फो मे
चाह रहा मन करूं शरारत
आज प्रकृति के रत्नो से

वो नाम छुपाते है मेरा
कांपते होठों की जुम्बिश मे
चाह रहा मन करूं बगावत
आज जहाँ की रस्मों से

सोंधा सोंधा सा मन हुआ
भींग हुस्न की बारिश मे
चाह रहा मन लिखूं इबारत
आज इश्क की नज्मों से

इल्म नही उनको फ़रो का
बेबाक गुजरते हैं गलियों से
चाह रहा मन करूं गुजारिश
मेरे साथ चले इन शहरों में

छूट गया मन्दिर मस्जिद
बैठा दर पे उसके बरसों से
चाह रहा मन करूं इबादत
आज सनम की कसमों से

शनिवार, 24 जनवरी 2015

वाकिफ इससे भी होने दो............



ना सुलझा मेरी उलझन, थोडा बेचैन होने दो, 

ये भी रंग इश्क का  है, वाकिफ इससे भी होने दो


ना रोको मेरे अश्कों को, जरा बरसात होने दो

ये भी मौसम इश्क का  है, वाकिफ इससे भी होने दो


ना बोलो कुछ लबों से आज, इन्हे खामोश रहने दो

ये भी जुबां, इश्क की है, वाकिफ इससे भी होने दो


ना बैठो नजदीक इतने तुम, जरा दूरी सी रहने दो

ये भी इशारे, इश्क के हैं, वाकिफ इससे भी होने दो


ना उठाओ आज पर्दा तुम, फासले ऐसे भी रहने दो

ये भी नजारा, इश्क का है, वाकिफ इससे भी होने दो


ना लेना हाथ, हाथों में, तडप थोडी तो होने दो

ये भी कशिश इश्क में है, वाकिफ इससे भी होने दो


ना आना आज ख्वाबों में, तमाम रात जगने दो

ये भी तजुर्बे, इश्क के हैं, वाकिफ इससे भी होने दो

गुरुवार, 20 नवंबर 2014

जाने कबसे


जाने कबसे इन आँखों में
तेरा ख्वाब सजाये बैठे हैं

बात करे, हम कुछ भी
तेरा जिक्र छुपाये बैठे हैं

जुल्फों की बदली में इक
सावन को बसाये बैठे हैं

हाथों की चंद लकीरों में
तेरा नाम लिखाये बैठे है

हथेली की हरी हिना में
खुशबू तेरी महकाये बैठे हैं

हर आती जाती सांसों में
तेरी आस लगाये बैठे हैं

पल पल बीत रहे लम्हों में
तेरी उम्मीद जगाये बैठे हैं

संग बिताये, चार पलों में
हम इक उम्र बिताये बैठे हैं

तनहा घनी अंधेरी रातों में
यादों के दिये जलाये बैठे हैं

क्या खबर तुझे, हम तुझमें
अपनी दुनिया बसाये बैठे हैं


GreenEarth