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शनिवार, 19 जनवरी 2019

गुलाबी इश्क के पन्ने



वो महीन गुलाबी
इश्क के पन्ने
और उन पर लिखी
मोहब्बत की आयतें
बेशकीमती हीरे सी
रखी है सहेज कर
यादों की रुमाली
चादर की तहों में
वो पन्ने जिनमें
अल्फाज नही
लिखे हैं सिर्फ
नर्म गर्म अहसास
हर दिन पढती और
लिखती रहती हूं`
कुछ न कुछ
तुम्हारी ही जबान में
सच कितना आसान होता है
बयां करना 
मन में उमडते जज्बात
अहसासों की जुबां मे
एक और बडी प्यारी सी 
खूबसूरती है इसमें
नही करना होता 
किसी को इन्तजार
किसी के चुप होने का
न कोई गुंजाइश होती
ना समझी की
ना ही आडे आती है
लफ्जों की दीवार
दोनो खमोशी से
एक ही पल में
कहते सुनते और 
लिखते रहते हैं
गुलाबी इश्क के पन्ने
अहसासों की जुबानी

मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

मुझसे मुहब्बत करने से पहले


मुझसे मुहब्बत करने से पहले
सुन लो मेरी दास्ता
पढ लो वो सारे पन्ने
जिनमें बसे हैं
कुछ महके पल
कुछ बेबस आंसूं
हाँ, खबर है मुझे
कि कई महीनों से
बन कर साया
रहते हो मेरे आस पास
करते हो कोशिश
मुझे जानने की
मुझे समझने की
आओ,
बैठो कुछ पल मेरे साथ
बताती हूँ तुम्हे
अपना अतीत
अपना इतिहास
अपने वो सारे राज
जिन्हे कैद कर रखा है
दिल के किसी कोने में
जिन्हे पढ नही सकता
कोई भी यूं ही राह चलते
तुम तो देख सके होगे
सिर्फ मेरा दूधिया रंग
गुलाब से होठ
कजरारी आंखे
लहराती जुल्फे
मगर दिखाती हूँ तुम्हे
माथे का न दिखने वाला कलंक
बदन पर चुभे कांटे
और आंखों में बसे सूखे अश्क
ये दिल जिसमें रखते हो
बसने की तुम ख्वाइश
हो चुका है घायल कई बार
जिन पैरों में
रखते हो तुम तमन्ना
पहनाने की
छन छन करती पायल
कर चुके है शोर
बांध कर मजबूरियों के घूंघरू
नही हो तुम प्रथम भ्रमर
कई बार हुआ है ये पुष्प दूषित
वैसे तो और भी है 
बहुत कुछ बताने को
मगर मेरे ख्याल से
इतना ही काफी है
तुम्हारे सोचने के लिये
कि क्या कुछ और जानना चाहिये था
मुझसे मुहब्बत करने से पहले

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

वरना तो अब तलक .........


घनी जुल्फों की छाँव क्या मिली, 
अंधेरों के कायल हो गये, 
वरना तो अब तलक हम भी,
उजालों के तलबगार थे..........

नजरें उनसे क्या चार हुयी
सादगी के कायल हो गये,
वरना तो अब तलक हम भी,
तितलियों के तलबगार थे..........

बलखा के चलते क्या देखा उन्हे
पायल के कायल हो गये,
वरना तो अब तलक हम भी,
घुंघरुओं के तलबगार थे..........

दिल में उनकी जो ख्वाइश जगी
मोहब्बत के कायल हो गये,
वरना तो अब तलक हम भी,
महफिलों के तलबगार थे..........

हम मिलकर उनसे बिछडे क्या 
प्यासी शाम के कायल हो गये,
वरना तो अब तलक हम भी,
रात - ए - मैखानों के तलबगार थे..........

बुधवार, 30 मई 2012

तेरे आने के बाद


तेरे आने से पहले मेरी नींदें
ख्वाबों से बेजार तो ना थी
प्यार के अहसास से दिल
मरहूम रहा हो ऐसा भी ना था
मगर फिर भी तेरे आने से
लगता है सब बदल सा गया
अब ही से तो हमने किया है
शुरू अपनी जिन्दगी को जीना
सुबह तब भी निकलता था
सूरज पूरब से ही और
शाम को चाँद भी आकर
बिखेरता था चाँदनी अपनी
मगर फिर भी तेरे आने से
लगता है सुबह लाती है प्यार
चाँद की चाँदनी मे घुली
होती है सनम मोहब्बत तेरी
फूल पहले भी खिलते थे
भीनी भीनी सी खुशबू लिये
सावन भी आया करता था
हल्की हल्की सी फुहारें लिये
मगर कुछ तो है ऐसा जो
पहले महसूस ना हुआ कभी
जाना है तेरे आने से
किस बात की थी हमको कमी
नजर वही है, नजारे भी है वही
बस बदल गया है नजरिया तेरे आने से
राहें वही है , और हम भी है वही
बस मिल गयी मंजिल तेरा साथ पाने से
आज जाना और माना हमने
क्यों होता है इश्क इबादत
कैसे बन जाता है अजनबी
जिन्दगी और सांसों की जरूरत............

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

मोहब्बत का असर


पा लिया है जबसे तुम्हे,
लगता ये जहान मेरा है ।

पलकों तले नजरों में,
छिपाया तेरा चेहरा है ...........

बुरी नही लगती मुझे,
अब तो काली राते भीं,

महसूस ये होता कि,
तेरी जुल्फों ने आ घेरा है ।

पा लिया है......
रंग सारे सतरंगी
मौसम हर बसंती लगे
जबसे तेरी बांहों का
मुझको मिला घेरा है
पा लिया....
आरजू नही दिल को,
अब तो कुछ भी पाने की,

जबसे मेरे, दिल का तेरे,
हुआ दिल मे बसेरा है।

पा लिया है......

तुमसे ना जुदा होना,
मंजिल तेरी, ही है मेरी,

जहाँ तुझे कोई, दर्द मिले,
वो रस्ता नही मेरा है।

पा लिया है.......

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

ऐसा क्यों हुआ ?????



सच्ची मोहब्बत एक आरजू बन कर ही रह गयी ।
उनकी यादें हमारी जिन्दगी की वजह बन गयी ॥


जिन आंखो में बसते थे तुम काजल बनकर ।
आज उन नैनों को अश्कों से ही चाहत हो गयी ॥


धडकता था दिल जिनके नाम लेने से ही कभी ।
आज धडकनों को दिल से ही बगावत हो गयी ॥


मेरे कदमों तले यूँ तो है जमाने भर की खुशी ।
मगर मेरे होठों को हंसी से ही नफरत हो गयी ॥


रात कहती है सजा ले कोई ख्वाब इन आँखों में ।
मगर आँखों को तो जागने की आदत हो गयी ॥


जख्म भर जाते है सभी इक दिन वक्त के मरहम से ।
मगर हमे जख्मों की हरियाली की ही हसरत हो गयी ॥


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