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बुधवार, 13 नवंबर 2019

आखिरी खत



सुनो, सुन तो रहे हो ना
मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है
छोड दो ना थोडी देर देर के लिये
ये लैपटाप, ये मोबाइल, ये कागज
याद भी है तुम्हे
कब से तुम्हारे पास तो हूँ
मगर साथ बिल्कुल भी नही
कभी मेरा चेहरा देखकर
होती थी तुम्हारी सुबहें
अब रात भर, मै नही
साथ होती हैं, तुम्हारी फाइलें
मगर आज कुछ पल के लिये ही सही
बन जाओ मेरे सिर्फ मेरे
हाँ हाँ जानती हूँ
बहुत व्यस्त हो तुम
एक एक मिनट है
बहुत कीमती
जैसे कभी हुआ करता था
कीमती एक एक पल मिलन का
कैसे बचाते थे एक एक घडी
और चाहते थे अधिक से अधिक
मेरे साथ होना, मेरे पास होना
दूरियों में भी होते थे
हम बहुत नजदीक
सुन लेते थे एक दूसरे की धडकनें
तुम्हे याद है वो पल
मिले थे जब तुम हमसे
क्या याद है तम्हे
अपना पहला संवाद
क्या याद वो पहली धडकन
दिया था जिसने बेचैनी को सुकं
क्या याद है वो पीपल
जिसकी छनती धूप में
हमारी परछाइयां
हो गयी थीं एक
याद कर सको तो याद करके देखो
वो सारे लम्हे, वो सारी बातें
यकीं है मुझे आज भी
गुदगुदा देंगें ये तुम्हारा मन
खिल जायेगी फिर से वो हसी
जिसे तुमने रख दिया है कही तहा कर
फिर से चाहेगा मन जीना
जिसे कहते है सचमुच में जीना
क्या हुआ जो खडे हैं हम तुम
ढलती शाम के साथ
क्या हुआ जो दे रहीं हैं दस्तक
झुर्रियां चहरों पर
रहने दो ना उन्हे
सीमित तन तक
मन तो है ना
आयु के बन्धन से मुक्त
तुमने ही तो सुनाया था मुझे
कालेज के विदाई समारोह में
न उम्र की सीमा हो
ना जन्म का हो बन्धन…….
पूंछोगे नही
आखिर का हुआ है आज 
जो पलटना चाह रही हूँ
अतीत के स्वर्णिम पन्ने
क्या मैं भूल रही हूँ अपनी उम्र
नही बिल्कुल भी नही
मगर चाह्ती हूँ कि 
तुम्हे याद दिला दूँ
हर वो पल जो भूल गये हो तुम 
अपने जाने से पहले
कही ऐसा न हो 
जब चाहो तुम यह सब याद करना
और तुम्हे कुछ याद ही न आयें
                                            --------- तुम्हारी प्रेमिका, तुम्हारी पत्नी 

शनिवार, 9 नवंबर 2019

बात हाथों की




हाथ ने बढाया हाथ
हाथ आया हाथ में
शर्म से फिर झूठ-मूठ
हाथ खींचा हाथ ने

चाहता हूँ रहे सदा, 
ये हाथ तेरे हाथ में
कही ये बात हाथ से
चुपके से तब हाथ ने 

हाथ की ये हाँ थी या
हाथ की थी ये अदा
हाथ की कुछ गर्मियां 
रख दी उसने हाथ में

हौसले हाथ के कुछ 
और थोडा बढ चले
दबा के फिर हाथ को
गुस्ताखी करी हाथ ने

कह सकी न धडकने
हाथ की, कुछ हाथ से
हाथ में ले एक दिल 
दिल एक रखा हाथ ने

कही बात दिल की कुछ
इस तहह से हाथ नें
और समझे लोग ये
मिलाया हाथ, हाथ ने

मंगलवार, 22 अक्तूबर 2019

खास हो गया..... something special happened......

उसके सुर्ख होंठों ने
छुआ जो मेरे नाम को
आम से ये नाम भी
आज खास हो गया

हम वही हैं आज भी
वही लकीरें हाथ में
हाथ आया हाथ में 
नसीब खास हो गया

दिन वही है उग रहा
शाम वो ही ढ्ल रही
डूबे तेरी चाँदनी में
चाँद खास हो गया

वही जमीं वही शहर
वही कदम वही डगर
साथ जब से वो चला
सफर ये खास हो गया

तलाश खत्म हो गयी
ख्यालों का नगर बसा
जुदा हुआ मै भीड से
शख्स खास हो गया

नजर को मेरी तू मिला
असर हुआ है कुछ नया
चमन हुये हो तुम मेरे
भ्रमर मै खास हो गया

शनिवार, 28 सितंबर 2019

क्या होगा


ठहरे हुये पानी में
वो आग लगा देते हैं
बहती हुयी लहरों का
अंजाम भला क्या होगा

झुकती हुयी नजरों से
वो कयामत बुला लेते है
ऊठती हुयी निगाहो का
अंदाज भला क्या होगा

उलझी हुयी जुल्फो से
वो सुबह को शाम करते है
भीगे हुए गेसुओं से
मौसम भला क्या होगा

हल्की सी एक झलक से
वो तारों को रौशन करते हैं
अंजुमन में उनके आने से
चांद का भला क्या होगा

आहट होती है आने की
और बहारें पानी भरती है
ठहरेंगें जब वो गुलशन में
कयामत का भला क्या होगा
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