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सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

क्या है ये प्यार?????????


प्यार - एक ऐसा शब्द जो मात्र शब्द नही- शक्ति है , जीवन का आधार है , एक ऐसी पूँजी है जिसे पाने के लिये हम खुशी खुशी अपना सब कुछ लुटा सकते हैं । प्यार एक ऐसा शब्द जिसकी हर किसी के लिये अपनी एक अलग परिभाषा है , हर किसी के लिये इसके अलग- अलग मायने है , हर किसी का अपना अपना तरीका है महसूस करने का, हर किसी का अपना अपना अंदाज है इसे बयां करने का मगर फिर भी एक बात जिसे सभी मानते है, प्यार त्याग है , प्यार विश्वास है प्यार सच है ।

प्यार जिसकी कमी जीवन को वीरान और उपस्थिति बहार बना देती है। प्यार जो कि कम या ज्यादा नही होता, प्यार सच्चा या झूठा नही होता , प्यार खोने या पाने का नाम नही होता, प्यार सिर्फ किया जाता है ।

प्यार जो विश्वास से शुरु होता है , विश्वास के साथ ही बढ्ता है , अक्सर विश्वास टूटते ही खत्म भी हो जाता है , हम अक्सर प्यार को जरूरत समझ बैठते है , जिसे हर कीमत पर पूरा ही करना चहते हैं, और यदि किसी कारणवश यह पूरा ना हो हो हम प्यार को अगले ही पल धोखे का नाम दे डालते हैं, हमारा दिश्वास एक ही पल में दम तोड देता हैं । उस पल हम सामने वाले की विवशताओं को समझने की थोडी सी भी कोशिश नही करते। जरा सोचिये यदि यही काम राधा ने किया होता, कृष्ण जी को धोखेबाज कह दिया होता तो क्या आज राधा युगों बाद भी वंदनीया होती? क्या आज भी लोग हीर रांझा को याद करते? क्या आज भी लोग प्यार के लिये शीरी फरियाद का उदाहरण देते ? क्या रोमियो जूलियट का नाम आज तक प्यार के इतिहास में दर्ज होता?

प्यार का मतलब अपनी नही अपने साथी की खुशी है,इस विश्वास के साथ की वह भी हमारे लिये ऐसा ही सोचता है .......................

यही सोच है मेरी प्यार के प्रति, आप क्या सोचते हैं क्या समझते है? जरूर बताइयेगा...

आप सभी का जीवन प्यार से परिपूर्ण रहे , प्रेम पर्व पर यही मेरी शुभकामना है............

युग बदले मौसम बदले,
बदले जीने के रंग ढंग ।
बदला नही गर कुछ जहाँ में,
तो नही बदले प्यार के रंग ।
वक्त बदले हालात बदले,
बदलते रहे जमाने के चलन ।
बदल नही सका जो जहाँ में,
नही बदला प्यार का चलन ।

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

मोहब्बत का असर


पा लिया है जबसे तुम्हे,
लगता ये जहान मेरा है ।

पलकों तले नजरों में,
छिपाया तेरा चेहरा है ...........

बुरी नही लगती मुझे,
अब तो काली राते भीं,

महसूस ये होता कि,
तेरी जुल्फों ने आ घेरा है ।

पा लिया है......
रंग सारे सतरंगी
मौसम हर बसंती लगे
जबसे तेरी बांहों का
मुझको मिला घेरा है
पा लिया....
आरजू नही दिल को,
अब तो कुछ भी पाने की,

जबसे मेरे, दिल का तेरे,
हुआ दिल मे बसेरा है।

पा लिया है......

तुमसे ना जुदा होना,
मंजिल तेरी, ही है मेरी,

जहाँ तुझे कोई, दर्द मिले,
वो रस्ता नही मेरा है।

पा लिया है.......

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

चेहरा


राधा जिसकी तारीफ करते लोग थकते नही, चाहे वो उसके रिश्तेदार हो, आस- पडोस के लोग हों या उसके मित्र । सभी कहते जिस घर जायगी, वो बहुत ही भाग्यवान होगा । मगर फिर भी ३२ सावन पार करने के बाद भी , अभी तक उसके पिता उसके लिये वर की खोज में ही लगे थे । स्वभाव से सुशील, काम काज में पारंगत, और डाक्टर होने के बाद भी उसकी एक कमी उसकी हर अच्छाई पर भारी पड जाती थी, उसका सुंदर ना होना । आज भी कुछ ऐसा ही हुआ, एक बार फिर ना चाहते हुये भी उसको स्वयं को अपमानित होते देखना पडा था । मन तो उसका बहुत कर रहा था कि वह भी कुछ ना कुछ उत्तर दे ही दे, मगर वह उसके संसकारों में नही था, इसलिये चुपचाप ही अपमान का घूंट पी गयी । मगर तभी उसने एक निर्णय लिया कि अब वह अकेले ही जिन्दगी व्यतीत करेगीं । और अपने जीवन को उन लोगों की सेवा में लगायेगी जिनकों उसके गुणों की कद्र है, रूप सौन्दर्य की नही ।
        आज राधा को गाँव का सरकारी अस्पताल ज्वाइन किये एक साल हो चुका था, वो खुश थी, गाँव वालों की नजर में वह किसी देवी से कम नही थी । अस्पताल में वह इलाज ही कर रही थी कि तभी रमई का लडका दौडता हुआ आया और बोला- दीदी जी गाँव के पार वाली रेलवे लाइन पर ट्रेन में आग लग गयी है । राधा तुरन्त अपने साथ और डाक्टर्र्स के साथ रेलवे लाइन तक गयी । काफी बडा हादसा हुआ था, ट्रेन के चार डिब्बों मे आग लगी थी । लेकिन एसी डिब्बों में आग लगने के कारण बहुत ज्यादा लोगों को क्षति नही हुयी थी । गम्भीर लोगों को तुरन्त अस्पताल ले जाया गया । राधा तन मन से घायलों के इलाज में लगी थी । एक दो लोग बुरी तरह जल गये थे , उन्हे पहचान पाना भी मुश्किल था । मगर राधा की नजर उस चेहरे को पहचान पाने में कैसे गलती कर सकती थी । फिर भी अतीत की कडवाहट को भुला कर उसने अपने डाक्टर होने के दायित्व को बखूबी निभाया । तीन दिन के बाद जब सुधाकर होश में आया तो राधा को सामने देखकर उसको यह समझते देर नही लगी कि उसको जीवन दान देने वाली वो ही लडकी है, जिसे एक दिन उसने ठुकराया था । इससे पहले की सुधाकर कुछ कहता, राधा ने कहा- मिस्टर सुधाकर अब आप काफी ठीक है , पाँच - छः दिन में आप घर जा सकते है , हाँ आपका चेहरा दुर्घटना में काफी बुरी तरह जल गया था, शायद इसके दाग जाने में काफी समय लग जाय । अब चलती हूँ और भी मरीजों को देखना है ।राधा को जाता हुआ देखकर , चाह कर भी वह बढ्कर उसका हाथ थामने की हिम्मत ना कर सका । उसे समझ आ गया था कि सच्ची दौलत क्या होती है, अनजाने में उसने क्या खो दिया है , मगर राधा जो कल तक उसकी नजर में एक सामान्य सी भी लडकी ना थी, आज एक देवी से कम ना थी। और वह स्वंय खुद की नजर में एक अच्छा इंसान तक ना था ..........................


हर किसी को लुभाता है जहाँ में नूर सा चेहरा,
अक्सर लोगों को उलझाता है ये नूर सा चेहरा ।
सूरत पर मिटने वालों की गिनती ही क्या कीजिये,
 
सीरत पे मर सके ,मुश्किल से ऐसा मिलता चेहरा ॥

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

मुलाकात के बाद


इक मुद्दत के बाद
जब उनसे मुलाकात हुयी

जुबाँ पे एक भी
लफ्ज ना पाया हमने.....

खुशी से आँखे नम
हुयी कुछ इस तरह

जैसे तपती रेत पर
ओस को पाया हमने......

माँग रही थी खुदा से
खुशी चंद लम्हात की

दीदार से तमाम उम्र का
बेशुमार सुकू पाया हमने....

ख्वाब जो हर रात
संजोती थी पलकों तले

हकीकत की जमीं पर
नूर सा पाया हमने.....

खुदा ठुकराता नही
सच्चे दिलों की दुआ

इस बात पर अब यकीं
खुद को दिलाया हमने....
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