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शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प बना "पलाश"

राज्य सरकार ने पलाश को उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प घोषित कर दिया है। इस संबंध में वन विभाग ने शासनादेश जारी कर दिया है। राज्य वन्य जीव बोर्ड ने आठ सितंबर 2010 को प्रदेश सरकार से पलाश को राज्य पुष्प घोषित करने की सिफारिश की थी। उत्तराखंड के प्रदेश से अलग होने से पहले अविभाजित उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल था। यह फूल 10 हजार फीट या उससे अधिक ऊंचाई पर उत्तराखंड में ही मिलता है। प्रदेश के विभाजन के बाद ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प बन गया। सन् 2000 में प्रदेश के विभाजन से लेकर अब तक उप्र का अपना कोई राज्य पुष्प नहीं था। राज्य पुष्प के चयन को लेकर यदि गफलत न होती तो पलाश के फूल को यह दर्जा शायद पांच साल पहले मिल गया होता। राज्य पुष्प के चयन में इसलिए भी लेटलतीफी हुई क्योंकि इस मामले में पैरोकारी करने के लिए पिछले कई वर्षों से प्रदेश में राज्य वन्यजीव बोर्ड का गठन ही नहीं हो पाया था। 18 जुलाई 2005 को राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में पलाश को राज्य पुष्प घोषित करने की संस्तुति की गई थी। बैठक में यह भी कहा गया कि पलाश को उप का राज्य पुष्प घोषित करने से पहले यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि यह किसी अन्य प्रदेश का राज्य पुष्प तो नहीं है। यदि ऐसा हो तो पलाश की बजाय जंगली हल्दी के फूल के नाम पर विचार किया जाए। वन विभाग ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि पलाश को झारखंड का राज्य पुष्प घोषित किया जा चुका है। यह पता चलने पर राज्य पुष्प के लिए राज्य वन्यजीव बोर्ड के निर्णय के क्रम में जंगली हल्दी के फूल के नाम पर भी विचार किया गया था। इस संबंध में जानकारी हासिल करने पर पता चला कि प्रदेश में जंगली हल्दी के पौधे सिर्फ वन क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। जंगली हल्दी की जड़ों का औषधीय महत्व तो है, लेकिन इसके पुष्प की विशेषता को लेकर प्रामाणिक जानकारी नहीं उपलब्ध थी। बाद में यह भी पता चला कि एक ही पुष्प को देश के कई प्रदेशों में राज्य पुष्प का दर्जा हासिल है। मिसाल के तौर पर कमल को हरियाणा, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक व उड़ीसा के राज्य पुष्प का दर्जा प्राप्त है।


भीषण गर्मी व ठंड में भी मुस्कराता "राज्यपुष्प"

आखिर क्यों न बनता राज्यपुष्प पलाश। उसमें हाड़कंपाऊ ठंड में मुस्कराते रहने की क्षमता है तो तन जलाने वाली गर्मी में भी हंसते रहने की ताकत। वह औद्योगिक रूप से लाखों लोगों का पेट भरता है, औषधि के रूप में बीमारी दूर भगाता है तो करोड़ों लोगों के जीवन में रंग भी बिखेरता है। इसीलिए अब होली पर ही नहीं हर रोज सिर माथे रहेगा पलाश। राज्यपुष्प घोषित पलाश को बुधवार को पूरा प्रदेश अतिरिक्त सम्मान भाव से देख रहा है। हरी किसी में उत्सुकता है कि आखिर पलाश में ऐसा क्या है जो उसे इतना ऊंचा दर्जा मिला? पलाश कोई छुईमुई समुदाय का नहीं जो छूते ही शर्म से मुरझा जाए। उसमें जहां पलाश 45 से 48 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में भी फूलता है वहीं 3 से 18 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में भी अपना आकर्षण बनाए रखता है। वह खुले प्रकीर्ण वनों में होता है, तो इसे प्यार से पौधारोपण करके भी उगाया जा सकता है। वैसे तो पलाश (अंग्रेजी का ब्यूटिया मोनो स्पर्मा), जिसे कुछ अंचलों में ढाक भी कहा जाता है, का फूल कवियों, चित्रकारों, वैद्यों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। सुर्ख लाल, सफेद, गुलाबी (हल्का) व पीला के रंगों में मिलने वाला राज्यपुष्प को डाक टिकट में राष्ट्रीय स्तर पर महत्व मिल चुका है। वैसे तो यह भारत के लगभग सभी प्रदेशों में पाया जाता है परंतु राज्यपुष्प घोषित होने से प्रदेश में मिर्जापुर व सोनभद्र सहित पूरे विंध्याचल क्षेत्र तथा बुंदेलखंड के सभी जनपदों में उसकी उपस्थिति बहुतायत है। यह क्षेत्र राज्यपुष्प के पोषक होने का गर्व कर सकते हैं। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के औषधीय पादप विकास योजना के मुख्य अन्वेषक डॉ. कौशल कुमार कहते हैं, होली में जिस टेसू के फूलों से रंग तैयार होता वह कोई और नहीं पलाश ही है। अब वह होली पर ही नहीं हर रोज हमारे सिर माथे पर रहेगा। मूत्रावरोध, चर्मरोग, ज्वर, सोरायसिस, गर्भादान रोकने, नेत्र ज्योति बढ़ाने, जल्दी बुढ़ापा न आने देने के लिए तो लाभकारी है ही, लाख व रंग तैयार करने का औद्योगिक लाभ भी देता है पलाश।

मैने आज से करीब तीन महीने पहले  अपने भाई आशीष से एक पलाश का पेड लगाने की इच्छा जाहिर की थी , हम बहुत मुश्किल से कल्यानपुर नर्सरी से इसे लाये थे और अपने घर के सामने पार्क में जब पलाश का पेड लगाया । तब मुझे नही पता था कि इसे भविष्य में इतना बडा गौरव मिलने वाला है । चूंकि मेरे ब्लाग का नाम पलाश है , ये मुझे सदा से प्रिय रहा , इसलिये मैने इसे लगाया भी था ।  मगर आज मुझे खुशी के साथ गर्व भी है कि अपने राज्य के इस गौरव की खुशबू से हमेशा हमारा पार्क महकेगा ।


जमाने की उलझी राहों में , पहचान बने आसान नही । 
जो महके महंगे गुलदस्तों में , तो वो पलाश की शान नही ॥ 

18 टिप्‍पणियां:

  1. गर्मी में चटख लाल रंग लिये खिलता है यह फूल, होली के रंगों को सजाता हुआ।

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  2. नरेन्द्र शर्मा जी की ये पंक्तियाँ...

    लो, डाल डाल से उठी लपट! लो डाल डाल फूले पलाश।
    यह है बसंत की आग, लगा दे आग, जिसे छू ले पलाश॥

    लग गयी आग; बन में पलाश, नभ में पलाश, भू पर पलाश।
    लो, चली फाग; हो गयी हवा भी रंगभरी छू कर पलाश॥

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  3. उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प बना "पलाश"
    ye to bahut hi khushi ke baat hai
    ढेर सारी शुभकामनायें.

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  4. पलाश के रंग बिरंगे फूलों के साथ आप को हार्दिक बधाई|

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  5. आपको बधाई. आपके ब्लॉग शीर्ष पर लिखी बातें ही मनमोहक हैं.

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  6. पलाश पर सुर्ख पलाश के गौरव भरे क्षण , हमको गौरान्वित कर गए . ये पलाश हमेशा ऐसे ही कुसुमित होता रहे .

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  7. अच्छी जानकारी दी आपने......... और अच्छा भी लगा ये पहले से भी आपके नाम के साथ जुदा है.. बधाई हो.
    .
    नये दसक का नया भारत (भाग- १) : कैसे दूर हो बेरोजगारी ?

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  8. बहुत ख़ुशी की बात है....और आपका लगाया हुआ पेड़ खूब बढ़े यही तमन्ना है....

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  9. ab is Palash ke aushdiy guno ki vajah se ko bhi buddha nahi hoga aur na hi aapki rachnaao ki vajah se koi akela

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  10. अच्छी जानकारी,
    आपको बधाई!

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  11. तब तो शुभकामनायें तुम्हे ही दूंगा ...शुभकामनायें !

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  12. आपको बहुत-बहुत बढ़ायी कि आपकी पसंद और आपके ब्लाग नाम वाला "पलाश "पुष्प उ.प्र.का राज्य-पुष्प भी बन गया है.
    वैसे केतु-ग्रह की शांति में भी इसका प्रयोग होता है.

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  13. अच्छा लगा यह जानकर कि उत्तर प्रदेश ने अपनी गौरवशाली परम्परा और संस्कृति को अब भी जिंदा रखा है , बधाई ।

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  14. सुन्दर जानकारी !
    अब उत्तर प्रदेश केतु-प्रभाव से बचा रहेगा ! :)

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  15. बधाई हो पलाश ,

    राज मुकुट बन गए देश के

    हो गए सबसे खास

    तुम अति सुंदर , तुम अति कोमल

    शुगना की चोंच से लाल

    हैं पांख तुम्हारी रूपवती के होंठ

    ज्यों डोरे पड़े रूपसी आँख

    शुग रीझ रीझ , चलि जात

    निज टोंट लाल लखि , रूप समाने

    सहज लरत निज जाति

    प्यारे प्यारे सुकोमल सुन्दर गात

    मन अरझी रह्यो सुन्दरता में

    ताते पायो ::राज मुकुट बिलाश ""

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