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मंगलवार, 3 जुलाई 2018

न यूं ही कहो हम हैं सही


बुरा किसी को कहने से
बुराइयां गर होती खत्म
शायद ये दुनिया जन्नत से भी
कही ज्यादा होती हसीं

जानते हो आप भी
यकी ये हमे भी है
महज चर्चा बुराइयों का करने से
जमीं जन्नत होगी नही

कहते है हम भी
कहते हो आप भी
जमाना खराब हुआ जाता
हर जमाने की है ये कही

ठहरो जरा सोचो जरा
किससे बना ये समाज है
कही अपने अंदर भी तो नही
बैठा बुराई का पुतला कही

छोड भी दो कहना कभी
ये बुरा है वो बुरा है
कुछ समय खुद को भी दो
न यूं ही कहो हम हैं सही

काम कीचड़ उछालने का
नेताओं पर ही छोड दें
आप हम तो आओ मिलकर
उखाड़े वुराइयां जड़ सेही

4 टिप्‍पणियां:

  1. जहां सर सारा समाज रंग गया हो एक रंग में
    कुछ कह कभी लगा न लो मेहदक महक ढंग से।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 5.7.2018 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3022 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, स्वामी विवेकानंद जी की ११६ वीं पुण्यतिथि “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं

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