न हँसने का दिल
न रोने का मन
कुछ गुमसुम सी
गुजर जाये तो अच्छा
कुछ अजनबी ही
रह जायें तो अच्छा
कुछ ठंडी शामे भी
मिल जाये तो अच्छा
जिन्दगी कुछ यूँ ही
बीत जाये तो अच्छा
न मिलने की आरजू
न खोने की कसक
वक्त कही खुद ही
ठहर जाये तो अच्छा
उम्र कुछ दरिया सी
बहती जाये तो अच्छा
न रोने का मन
कुछ गुमसुम सी
गुजर जाये तो अच्छा
न दोस्ती का नाता
न बैर का रिश्ताकुछ अजनबी ही
रह जायें तो अच्छा
न गर्म दोपहर
न स्याह रातकुछ ठंडी शामे भी
मिल जाये तो अच्छा
न जीने की तमन्ना
न मरने की ख्वाइशजिन्दगी कुछ यूँ ही
बीत जाये तो अच्छा
न मिलने की आरजू
न खोने की कसक
वक्त कही खुद ही
ठहर जाये तो अच्छा
न गुरुर का नशा
न कमतर का गमउम्र कुछ दरिया सी
बहती जाये तो अच्छा
