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मंगलवार, 5 जून 2012

क्या लिखूँ -- दर्द या खुशी


चाहती हूँ हमेशा लिखना
वो जो औरों को खुशी दे
उन्हे कुछ पल अपने
हंसी अतीत में खोने दे

मेरे हर शब्द उन्हे लगे
बात अपने ही मन की
पढते पढते सोचने लगे
कहानी अपने ही मन की

मगर सदा सम्भव नही
होता औरों को हँसाना
अपने शब्दों के दर्पण में
किसी की तस्वीर बिठाना

भरा हो मन ही जब
पीर के पानी से
कैसे श्रंगार गाऊँ
कवित्व की बानी से

मगर नही छुपाना ही होगा
दर्द को किसी अलंकार मे
उलझाना ही होगा अश्कों को
शब्दों के भ्रमर जाल में

जैसे आँसू खुशी और गम
दोनो में ही आते है
देखने वाले मगर उसकी
अपनी अपनी परिभाषा बनाते हैं

वैसे ही लिखूँगीं कलम से
कुछ इस तरह के गीत
खुशहाल हो या जख्मी दिल
मिले उसे अपना ही अतीत

17 टिप्‍पणियां:

  1. मन मोहक सुंदर प्रस्तुति ,,,,,

    पोस्ट पर आइये स्वागत है ,,,,,,अर्पणा जी

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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  2. दोनों ही लिखिये, पर सुख को ही बताइये..

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  3. मगर सदा सम्भव नही
    होता औरों को हँसाना
    अपने शब्दों के दर्पण में
    और की तस्वीर बिठाना//
    आपने दिल जीत लिया

    उत्तर देंहटाएं
  4. वैसे ही लिखूँगीं कलम से
    कुछ इस तरह के गीत
    खुशहाल हो या जख्मी दिल
    मिले उसे अपना ही अतीत

    क्या खूब लिखा है आपने ...
    रचनाएँ तो ऐसी ही होनी चाहिए जिसमें पाठक खुद को पा ले ...
    सुंदर रचना ... बधाई .

    उत्तर देंहटाएं
  5. वैसे ही लिखूँगीं कलम से
    कुछ इस तरह के गीत
    खुशहाल हो या जख्मी दिल
    मिले उसे अपना ही अतीत

    क्या खूब लिखा है आपने ...
    रचनाएँ तो ऐसी ही होनी चाहिए जिसमें पाठक खुद को पा ले ...
    सुंदर रचना ... बधाई !!

    उत्तर देंहटाएं
  6. भरा हो मन ही जब
    पीर के पानी से
    कैसे श्रंगार गाऊँ
    कवित्व की बानी से...

    बहुत सुन्दर...!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. दोनों जीवन के पहलू हैं ....इसलिए दोनों की अभिव्यक्ति होती है रचनाकर्म में ...!

    उत्तर देंहटाएं
  8. अनुपम भाव संयोजन... सुंदर रचना समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

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  9. वैसे ही लिखूँगीं कलम से
    कुछ इस तरह के गीत
    खुशहाल हो या जख्मी दिल
    मिले उसे अपना ही अतीत....भावमय करते शब्‍दों का संगम.... super di...

    उत्तर देंहटाएं
  10. क्या खूब लिखा है आपने .....कमाल हैं आप भी !

    बहुत सुंदर कविता के लिए हृदय से आभार और बधाई !

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  11. संशय कैसा ..
    लेखनी स्वयं रास्ता चुन लेगी

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  12. स्वान्तः सुखाय लिखी कविता...सुन्दर कविता
    याद रखें लेखनी उन्मुक्त है...

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  13. दर्द भी लिखो ख़ुशी भी लिखो ,अपने मन के मुस्कान की हंसी भी लिखो
    पर नहीं लिखना सुख को छीनने वाली बेबसी ,दर्दे दिल के अरमानो की बदनसी भी लिखो

    उत्तर देंहटाएं

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