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शनिवार, 12 जनवरी 2013

नारी मन


वो ख्वाब किसी की आंखों का, वो शब्द किसी की बातों का,

जीवन के हर क्षण में वो, वो आधार  सभी की सांसों का

रूप बदल बदल वो आये, हर रूप में सबका साथ निभाये

बिन उसके जीना असम्भव, पर सभी को ये समझ ना आये

दुनिया कभी पूजती उसको, कभी करती है उसका अपमान

नादां लोग ना जा सके, है उसके मान में ईश का मान

वो जीवन की धुरी धरा पर, उसका जीवन ही खतरे में

जब प्रहरी भी बन जाते भक्षक, तो बचे वो कैसे पहरे में

गॄहलक्ष्मी को ग्रहण लगाते, आंखों के तारे राहू बन जाते

कहने को ज्ञानी कहलाते, पर "नारी मन" समझ ना पाते

19 टिप्‍पणियां:

  1. लोहड़ी और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

    दिनांक 14/01/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. समझने के लिये प्रेम आवश्यक है।

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  3. आज की सच्चाई दिखाती हुई रचना आभार ......

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  4. दुनिया कभी पूजती उसको, कभी करती है उसका अपमान
    नादां लोग ना जा सके, है उसके मान में ईश का मान ...

    काश हर कोई इस बात को जान सकता ... ईश्वर की पूजा है नारी मन का सम्मान ...

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति सोमवार के चर्चा मंच पर ।। मंगल मंगल मकरसंक्रांति ।।

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  6. "यत्र नारी पूज्यते ,तत्र देवता रमन्ते" ....
    प्रभावशाली रचना !
    लोहड़ी व मकरसंक्रांति की शुभकामनाएँ !

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    मकर संक्रान्ति के अवसर पर
    उत्तरायणी की बहुत-बहुत बधाई!

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  8. मकर संक्रान्ति की शुभ कामनाएँ !

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  9. कहने को ज्ञानी कहलाते, पर "नारी मन" समझ ना पाते....एकदम सही बात..सुंदर रचना

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  10. बहुत सुन्दर और सच्ची बात कही अपर्णा जी.....
    मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ

    अनु

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  11. कहने को ज्ञानी कहलाते, पर "नारी मन" समझ ना पाते.....achcha likha hai.

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  12. वो जीवन की धुरी धरा पर, उसका जीवन ही खतरे में

    जब प्रहरी भी बन जाते भक्षक, तो बचे वो कैसे पहरे में


    जहां नारी का सम्मान नहीं वहां रब्ब भी नहीं बसता ...

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  13. अफ़सोस ..कि "नारी मन" समझ ना पाते.
    अभिव्यक्ति बेहतरीन है !

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  14. गॄहलक्ष्मी को ग्रहण लगाते, आंखों के तारे राहू बन जाते

    कहने को ज्ञानी कहलाते, पर "नारी मन" समझ ना पाते
    सच्ची बात कही अपर्णा जी.....!

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  15. नारी मन और सागर जल इनकी कोइ न थाह , डूबे पावे प्रेम जल, तीर खड़े अफवाह

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  16. "वो ख्वाब किसी की आंखों का, वो शब्द किसी की बातों का"...i have no more words to say.

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