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बुधवार, 8 सितंबर 2010

जिन्दगी क्या है ??



जिन्दगी कभी सवाल कभी जवाब होती है,
कभी ये हकीकत कभी ख्वाब होती है ।
किसी एक पल खुशियाँ बेहिसाब होती है ,
कभी उम्र भर के गम का सैलाब होती है ॥

कभी हंसी मुकद्दर बन मुस्कुराती है जिन्दगी ,
कभी मुकद्दर की हंसी उडाती है जिन्दगी ।
कभी खुशी में आँख नम कर जाती जिन्दगी ,
कभी दर्द में अश्कों का रेगिस्तां बन जाती जिन्दगी ॥

कभी दुनिया के बाजार में बेची जाती जिन्दगी ,
कभी बिना दाम के ही बिक जाती जिन्दगी ।
कभी अल्लाह से दुआ जीने की माँगती जिन्दगी ,
कभी मौत की भीख को तरसती रह जाती जिन्दगी ॥

कभी  गुलिस्ताँ का हसीन फूल जिन्दगी ,
कभी पतझड में बिखरे पत्तों सी जिन्दगी ।
कभी सबसे अजीज दोस्त लगती जिन्दगी ,
कभी  दुश्मन के खंजर सी  चुभती जिन्दगी ॥

साँसो के आने जाने का नही नाम जिन्दगी ,
हासिल करने का ही तो नही नाम जिन्दगी ।
औरों के जो काम आये वो ही पल है जिन्दगी ,
मर कर भी जो जिये उसी का नाम जिन्दगी  ॥

13 टिप्‍पणियां:

  1. सांसो के आने जाने का नही नाम जिन्दगी ,
    हासेल करने का ही तो नही नाम जिन्दगी ।
    औरो के जो काम आये वो ही पल है जिन्दगी ,
    मर कर भी जो जिये उसी का नाम जिन्दगी ॥

    यही तो है ज़िन्दगी।
    जीना उसी का जीना है जो औरो के काम आये।

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  2. बहुत खूबसूरती से ज़िंदगी को कहा है ..

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  3. बहुत पसन्द आया
    हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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  4. bahut khubsutarti se jindgi ko shabdon main piroya hai.

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  5. औरों के जो काम आये वो ही पल है जिन्दगी ,
    मर कर भी जो जिये उसी का नाम जिन्दगी ॥
    zindgi ke kai roop ....
    sunder rachna ...!!

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  6. बहुत बेहतरीन परिभाषित किया है जिन्दगी को.

    उत्तर देंहटाएं
  7. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 17-05-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

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  8. कभी हंसी मुकद्दर बन मुस्कुराती है जिन्दगी ,
    कभी मुकद्दर की हंसी उडाती है जिन्दगी ....... खूब
    http://boseaparna.blogspot.in/

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