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सोमवार, 7 नवंबर 2011

अन्जाना गुनाह


मुझे नही मालूम की इसे प्यार कहा जाय , दीवानापन कहे या दिल की नादानी, मगर कभी कभी किसी को एक झलक देख कर ही हम उसे अपना दिल दे बैठते है , कभी कभी हम बिना कुछ जाने समझे ही लाखों सपने बुनने लगते हैं , और फिर जब उन सपनों के आसमां से हकीकत की जमीं पर आते हैं सब कुछ जानते हुये भी दिल कुछ समझना ही नही चाहता .........

अन्जाने में आज हमसे इक गुनाह हो गया ,

उनकी इजाजत के बिना उनसे प्यार हो गया

वो छुपाते रहे खुद को रेशमीं चिलमन में,

मगर मेरी नजरों को उनका दीदार हो गया

कल तक हसँते थे हीर मजनूं की दास्तां पे,

नाम अपना भी दीवानों में अब शुमार हो गया

गुजरते गुजरते मोहब्बत के साहिलों से दिल,

इश्क के दरिया में डूबने को बेकरार हो गया

ना नाम ही जाना , ना पता ही घर के उनका,

बस इस मोड से गुजरने का इन्तजार हो गया

उनकी नजरों ने नजर भर भी ना देखा हमको,

उन्हे भी प्यार है हमसे, ये हमे ऐतबार हो गया

इक हसीं सी हँसी ही सुनी, आज तलक उनकी,

हम समझने लगे मोहब्बत का इकरार हो गया

वो जो आये कुछ देर से किसी और के साथ,

गुल खिलने से पहले ही गुलशन उजाड हो गया

30 टिप्‍पणियां:

  1. जाने क्यों मुझे बिहारी की पंक्तियाँ याद आई.

    कहत नटत रीझत खीझत मिळत खिलत लजियात
    भरे भवन में ही करत है , नैनो सो ही बात

    सुँदर भावपूर्ण ग़ज़ल और इस गुनाह के क्या कहने . माशाल्लाह .

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  2. वो छुपाते रहे खुद को रेशमीं चिलमन में,
    मगर मेरी नजरों को उनका दीदार हो गया|
    बहुत खुबसूरत शेर दाद को मुहताज नहीं फिर भी दिल से निकला वाह वाह

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  3. सुंदर अभिव्यक्ति ...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  4. :-)
    बढ़िया ....
    शुभकामनायें आपको !

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  5. वो जो आये कुछ देर से किसी और के साथ,

    गुल खिलने से पहले ही गुलशन उजाड हो गया

    बहुत सही और अच्छा लिखा है आपने।

    सादर

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  6. खुबसूरत एहसासों की सुन्दर ग़ज़ल....

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  7. वाह ... मतले ने ही बाँध लिया ... कमाल की गज़ल है ... हर शेर उम्दा ...

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  8. गुल खिलने से पहले गुलशन उजाड़ हो गया ...
    बुरा हुआ फिर भी ग़ज़ल अच्छी है !

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  9. हम समझने लगे मोहब्बत का इकरार हो गया

    वो जो आये कुछ देर से किसी और के साथ,

    गुल खिलने से पहले ही गुलशन उजाड हो गया

    खुबसूरत एहसासों की सुन्दर ग़ज़ल....

    उत्तर देंहटाएं
  10. दिल की बातें दिल ही जाने...
    बढि़या कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  11. ना नाम ही जाना , ना पता ही घर के उनका,

    बस इस मोड से गुजरने का इन्तजार हो गया

    ...बहुत खूब! सुंदर गज़ल...

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  12. खुद से खुद को मिला कर देख ,
    हाथ हवाओ में फैला कर देख .
    मिलेगा वही जिस की हसरत है तुझे ,
    बस खुद में नजरे गड़ा कर देख .......

    उत्तर देंहटाएं
  13. खुद से खुद को मिला कर देख ,
    हाथ हवाओ में फैला कर देख .
    मिलेगा वही जिस की हसरत है तुझे ,
    बस खुद में नजरे गड़ा कर देख .......

    उत्तर देंहटाएं
  14. कल 14/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  15. बहुत खूब.... सुन्दर प्रस्तुति...
    सादर बधाई...

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  16. aaj jane kaise ye gunaah ho gaya
    dil ki jabaan pe aai
    aur na chah kar bhi
    dard-e-dil bayaan ho gaya...

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  17. हम तो सपने देखने लगे थे इसे पढते-पढते…पर अंतिम पंक्तियों ने हकीकत से रूबरू करा दिया……। बहुत सुन्दर्…………

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