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शुक्रवार, 16 मार्च 2012

वो नजर................


उनकी शोख मस्त नजर में ना जाने क्या बात थी,

देखा जबसे, उस पल से दिल मुझसे बेगाना हो गया ॥

वो रूक रूक के चले जब, हौले से छनका के पायल,

घायल दिल वही उनके इन्तजार में दीवाना हो गया ॥

इक नाम ही बस जाना है, जिस पल से हमने उनका,

सारी दुनिया से क्या, खुद से ही मै अन्जाना हो गया ॥

भीगी भीगी सी जुल्फे बिखेरे, वो जो निकले सरे बाजार,

कहा कुछ ना उनसे पर, दुश्मन ये जमाना हो गया ॥

उनको नही खबर, मेरे बीमार -ए -दिल के हाल की,

और हर एक जुबां पे आम, मेरा अफसाना हो गया ॥

14 टिप्‍पणियां:

  1. उनकी शोख मस्त नजर में ना जाने क्या बात थी,
    देखा जबसे, उस पल से दिल मुझसे बेगाना हो गया ॥

    बढिया अभिव्‍यक्ति !!

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  2. कल्पना लोक से उतरी सुँदर नायिका का सजीव चित्रण . मुग्धकारी

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  3. देखा जबसे, .......... बेगाना हो गया, बहुत ही प्यार से भरी प्यारी है

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  4. इक नाम ही बस जाना है, जिस पल से हमने उनका,
    सारी दुनिया से क्या, खुद से ही मै अन्जाना हो गया ॥
    बेहतरीन प्रस्तुति...

    MY RESENT POST ...काव्यान्जलि ...: तब मधुशाला हम जाते है,...

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  5. देखा जबसे.........बेगाना हो गया, शानदार लिखा है

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  6. उनकी हर शै दीवाना कर देती है ... बहुत लाजवाब ...

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  8. उनको नही खबर, मेरे बीमार -ए -दिल के हाल की,
    और हर एक जुबां पे आम, मेरा अफसाना हो गया ...
    पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है , जाने न जाने गुल ही ना जाने , बाग़ तो सारा जाने है !
    खूबसूरत अभिव्यक्ति !

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  9. बहुत ही सुन्दर ...
    लाजवाब:-)

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