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सोमवार, 10 दिसंबर 2012

अरुणिमा भाग -२


आज आपको अपने जीवन के उस मोड पर ले चलती हूँ , जहाँ पहली बार उससे मिली थी बात करीब १८- २० साल पहले की है पिता जी हर साल गर्मी की छुट्टियों में हमे कही ना कही जरूर घुमाते थे ।और इस बार तो मै ८वीं में फस्ट आयी थी , तो वायदे के अनुसार इस बारहम रानीखेत घूमने आये थे हम लोग जिस होटल में रुके थे , वहाँ अरुणिमा के पापा माली थे ।वो भी अपने पिता जी के साथ दिन भर वही रहती थी और छोटे मोटे काम किया करती थी । दो ही दिन में वो मेरी बहुत अच्छी सहेली बन गयी थी। अक्सर वो मेरे लिये ताजे ताजे फल तोड कर लाया करती थी । जब तक मै खा ना लूँ खुद ना खाती कहती दीदी आप खा लो हम फिर खा लेंगे । आज पापा को किसी से मिलने के लिये जाना था , और माँ रूम में लेटी थी , और मै अरुणिमा के साथ गार्डेन में खेलने के लिये आ गयी थी । हम दोनो खेल ही रहे थे कि अचानक से दौडते दौडते हम मेन सडक पर आ गये थे कि मेरे सामने से एक मोटर निकली एससे पहले कि मै कुछ समझ पाते किसी ने मुझे एक धक्का सा दिया मै दूर सडक के दूसरी तरफ जा गिरी , मै तो बच गयी थी, मगर मुझे जिसने धकका दिया था वो नही बच सका था । वो  कोई और नही अरुणिमा के पिता ही थे , मुझे बचाते बचाते वो अपनी जान गवां चुके थे ।  मुझसे थोडी ही देर पहले ही तो उन्होने कहा था- बिटिया बस यही अंदर खेलना बाहर ना जाना, यहाँ सडक से बहुत तेज गाडियां निकलती हैं ।

अरुणिमा - पांच छः साल की लडकी जो दिन भर चिडिया की तरह पूरे बगीचे में फुदकती रहती थी, बिल्कुल बेजान पत्थर सी बने गयी थी । जब पिता जी ने उसके बाकी घर वालों के बारे में पता किया तो उन्हे मालूम हुआ कि उसके पिता के सिवा उसका कोई और नही था । फिर तो माँ और पिता जी उसको हमेशा अपने साथ रखने का निश्चय करके उसको अपने ही साथ ले आये थे ।

दुर्घटना तो एक घटित हुयी थी मगर भाव सबके मन में अलग थे । जहाँ एक तफर अरुणिमा का मन अपने पिता को खो कर दुखी था, मेरे मन में एक अपराध बोध आ चुका था, मुझे बस यही लगता था कि मेरे ही कारण ऐसा हुआ है, मैं ही अरुणिमा के दुख का कारण हूँ । अपना घर अपने पिता को खोने के बावजूद अरुणिमा ने ही मेरे मन से इस अपराध की भावना को कम किया था ।
क्रमशः ....... 

8 टिप्‍पणियां:

  1. अपराध बोध होना स्वाभाविक है,,भावनात्मक सुंदर अभिव्यक्ति के लिए बधाई,,,,,अर्पणा जी,,,

    recent post: रूप संवारा नहीं,,,

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  2. इतना ज़रा-सा !थोड़ा अधिक लिख दिया कीजिये ,प्लीज़.

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    1. apni agli post mai koshish karungi k aapko aur bahut kuch jaanane ko mile arunimaa k baare mai ..
      post par bane rahane k liy dhanywaad

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  3. आगे के मोड़ जाने की प्रतीक्षा रहेगी

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  4. ओह ... बहुत कुछ कहेगी यह कहानी ... इंतज़ार है ।

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  5. कहानी संवेदनाओं को छूते हुवे गुज़र रही है ...

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