प्रशंसक

गूगल अनुसरणकर्ता

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

अरुणिमा


अरुणिमा , मेरी कहानी की मुख्य पात्र। मेरे जीवन का केन्द्र बिन्दु। जीवन के हर उतार चढाव की साथी।
बहुत समय से सोच रही थी कि अपने और उसके जीवन को कागज के पन्नों पर अंकित करूं, मगर हमेशा डरती थी कि कही ऐसा ना हो कि मेरी लेखनी उसके व्यक्तित्व के साथ न्याय ना कर सकी तो...
और फिर लिखने का ख्याल मन से हटा देती।
और फिर आज निर्णय ले ही लिया, वो भी उसके कहने पर । कितनी मासूमियत से उसने कहा था- जीजी आप तो इतना अच्छा लिखती हैं, कभी अपनी किसी कहानी में हमारा भी नाम लिख दीजिये, इसी बहाने हम भी छप जायेंगें । वो ये नही जानती थी कि मैं सिर्फ उसका नाम ही नही उसकी पूरी जिन्दगी को लिख देना चहती थी मगर कभी खुद को इस स्तर का अपनी ही नजर में नही पाती थी ।
अरुणिमा यूँ तो उम्र में मुझसे बहुत छोटी थी, मगर बाकी हर चीझ में मुझसे बडी थी, मुझे कोई भी परेशानी हो - छोटी या बडी , उसके पास हर परेशानी का कोई ना कोई हल जरूर होता था।
क्रमशः .........



7 टिप्‍पणियां:

आपकी राय , आपके विचार अनमोल हैं
और लेखन को सुधारने के लिये आवश्यक

GreenEarth