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शुक्रवार, 17 अक्तूबर 2014

बस तुम ही हो मेरा जीवन....................


मै नही देती हक किसी को
मुझे जीता या हारा कहने का
मुझे नही होती खुशी
अपनी झूठी तारीफ सुन कर
मुझे तकलीफ भी नही होती
जब बेगाने इंगित करते है कमियां मेरी
मुझे नही मिलती राहत
परायी संत्वनाओं से किसी पल
नही बहते मेरे आंसू
जब खो जाती है मेरी कोई चीज
ऐसा नही मुझे खुशी या गम
महसूस नही होता
रो पडती हूँ देखकर
आंसुओ की आहट माँ की आंखो में
बेबस हो जाती हूँ ये सुनकर
जब वो कहती है
कैद कर लिया है मैने खुद को
घर की चार दीवार में
क्योकि नही दे पाती वो जवाब
जमाने के सवालों का
गुनाह बस उसका है इतना
नही कर पाई है वो हाथ पीले अपनी बिटिया के
नही बेच पाई वो अपने जिगर के टुकडे को
किसी योग्य वर के हाथों में
माँ कैसे यकीन दिलाऊं
मै खुश हूँ तेरे आंचल में
मुझे नही लगती कोई कमी
अपने इस खुशहाल जीवन में
मै खुश नसीब हूँ कि आज भी
मिलती है तेरे हाथ की रोटी
और आ जाती है सुकून की नींद
तेरी जन्नत सी गोद में...............

3 टिप्‍पणियां:

  1. जमाने के सवालों का जवाब बेटियाँ खुद दे सकती हैँ अपने आप को साबित कर के। हाँ यहाँ सवाल उठ सकता है कि बेटियाँ ही क्युँ खुद को साबित करने को मजबूर हों ?

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  2. Bahut hi marmsparshi rachna ... Maa ke aanchal me wo jannat ki khush hai jo jannat me bhi nahi hai .... Lajawaab likha hai..aanand aa gya padh kaar !!

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  3. मा का आंचल तो है सदा के लिये
    वही बल देती है जहां से लडने को
    खुशी और गम तो सदा ही रहेंगे
    साथी भी मिलते बिछड़ते रहेंगे

    साथ मांगने पे नहीं मिलता
    साथी भी कभी सदा नहीं होता
    ना किसी का गुनाह ना किसी का दोष
    दोष तो है इस जहां का

    खुशियाँ आने से डरती हैं और गम जाने से
    पर जीवन का ये कारवां रुक तो नहीं जाता

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