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गुरुवार, 4 अगस्त 2016

मै किसी की आँख का नूर हूँ............




मै किसी की आँख का नूSर हूँ
मै किसी के दिल का करार हूँ
जो चुरा ले नीदें सुकून ओ चैन
मै वो मचलताSS ख्याSSल हूँ

मै किसी की आँख का नूर हूँ............

ना फिकर मुझे इस बाSSत की
क्या कहे जमाना घडी घडीSS
ना मै सोचता, न समझता हूँ
मै तो करता उसकी ही बन्दिगी
जो रुका रुका है जबाSSन पर
मै वो अनकहाSS सवाSSल हूँ

मै किसी की आँख का नूर हूँ............

तेरी याSSद में जो पल कटेS
हर एक पल लगें मुSद्दतेंSS
है अजब ये इश्क की दास्तां
हर पल बढेंSS मेरी हसरतेंSS
जो सबब किसी के अश्कों का
मै वो सिसकताSS मलाSSल हूँ

मै किसी की आँख का नूर हूँ............

ना हो बेसबर मेरे हमनशींSS
कुछ और कर मुझपर यकींS
तेरे साSथ ही मुझे जीSSना है
तेरे हाSSथ है मेरी जिन्दगीSS
जो लगा दे आग पाSSनी में
मै वो सुलगताSS बवाSSल हूँ

मै किसी की आँख का नूर हूँ............

मै किसी की आँख का नूर हूँ
मै किसी के दिल का करार हूँ
जो चुरा ले नीदें सुकून ओ चैन
मै वो मचलता SSख्याSSल हूँ



1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-08-2016) को "धरा ने अपना रूप सँवारा" (चर्चा अंक-2427) पर भी होगी।
    --
    हरियाली तीज और नाग पञ्चमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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