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बुधवार, 7 सितंबर 2016

हिन्दी, हिन्द की आत्मा है



हिन्दी जन जन की भाषा है
हिन्दी विकास की आशा है
हिन्दी में है हिन्द बसा
हिन्दी अपनी परिभाषा है

हम सोच रहे है हिन्दी में
दिल समझे अपना हिन्दी में
फिर क्यो शर्माते फिरते है
जब बोल रहे हम हिन्दी में

कम्प्यूटर के है निकट हिन्दी
हिन्दी है भारत की बिन्दी
हिन्दी है अपनी सौम्य सरल
हिन्दी से है भारत का कल

हिन्दी दिवस अभी तो मनायेगे
कल इंगलिश इंगलिश चिल्लायेगे
हिन्दी मे सब सम्भावित है
हिन्दी सुगम सरल प्रभावित है

हिन्दी को न्याय दिलाने को
इसे विश्व पटल पर लाने को
संकल्प करे सब मिल कर ये

हिन्दी में ही हम काज करें

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (09-09-2016) को "हिन्दी, हिन्द की आत्मा है" (चर्चा अंक-2460) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 09 सितम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर पिरोई है हिन्दी कविता में ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सत्य कहा, हमारी भाषा ही हमारी उन्नति का मूल है सुन्दर! रचना ,लयबद्ध अपने लेख "अंतर्नाद करती हिंदी" के लिए आपको आमंत्रित करता हूँ। आभार

    उत्तर देंहटाएं

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