प्रशंसक

friend लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
friend लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 5 मार्च 2017

डिजिटल युग में दोस्ती के नये रूप................Dizitalization of Friendship


आदमी- काश मेरे पास एक दोस्त होता
जिससे कह पाता अपने मन की बात
जो समझ सकता मेरी परेशानी
सब छोडकर देता मेरा साथ
तभी बोला मन- एक के लिये आप अभी भी रोते जाते है
फिर क्या सोचकर रोज फेसबुक पर मित्र बनाये जाते है

*******************************************

आदमी- आप बहुत अच्छा लिखती है,
लेखनी में आपकी सौम्यता छलकती है
यदि आपको अनुचित ना लगे
तो क्या करेगीं मेरी फ्रैड रिक्वेस्ट स्वीकार
महिला- ये मेरा सौभाग्य है जिसे
कर चुकी थी अर्पित अग्नि समक्ष
बीस वर्ष पहले अपना तन मन
आज प्रस्तुत है वो लेकर निवेदन

*******************************************

पहले दोस्ती होती थी धरती सी
जिसमें गहराई नापी जाती थी
आज विकसित हो गयी है गगन सी
जिसमें होता है सिर्फ आंकडों का विस्तार

********************************************

आधुनिकतावाद ने किया दोस्ती पर शोध
और बताये दोस्तो के तीन प्रकार
गर्ल फ्रैंड, ब्वाय फ्रैंड और फेसबुक फ्रैंड
और इन सबको बांधा एक सूत्र में
जिसका नाम है अन्फ्रैंड

********************************************

डिजिट्ल युग की सबसे बडी देन
घर बैठे अनलिमिटेड फ्रैंड पाये
जब चाहे जिसे चाहे जब तक चाहे
मित्र बनाये दोस्ती निभाये

********************************************

हजारों ने भरपूर मित्रता निभायी
घंटे भर में सब थे मेरे साथ
लाइक कर रहे थे मेरी पोस्ट
जिसमें बताया था, हुआ है
कल रात मेरी माँ का देहान्त

********************************************

जाने कहाँ विलुप्त हुये
सुदामा और श्याम
फूल माला भोग का
नही पूजा में कोई काम
ईश्वर तो देखता है
मात्र सच्चा भाव
श्रद्धा से शेयर होता
भगवान और भक्तिभावो
सर झुकाने मुराद पाने
नही जाना ईश के द्वार पर 
कि भगवान मन्दिर मस्जिद नही
मिलते हैं अब फेसबुक वाल पर

रविवार, 1 फ़रवरी 2015

जीवन की कडियां - रिश्ते

रिश्ते जो मिल जाते हैं
जन्म के साथ
और बन जाते हैं आधार
जीवन का
ये मिट नही सकते
बदलते रहते हैं
नही बदलता रंग लहू का
बदलती है सिर्फ उसकी गर्माहट
इस श्रेणी में आते हैं
भाई बहन माता पिता
चाचा ताऊ और भी बहुत
*******************************************
रिश्ते जो मिलते हैं
घर की दीवार से
निभाना होता हैं जिन्हे
जिन्दगी चलाने के लिये
साथ खेलने लडने के लिये
कभी चीनी उधार मांगने को
कभी अपनी खुशियां बांटने  को
जो वाकिफ होते हैं
मेरे घर की हर आवाज से
दरवाजे पर बजी डोर बेल से
रिश्तों की भाषा में
 कहते हैं जिन्हे पडोसी
*******************************************
रिश्ते जो मिलते है
घर के बाहर
और बन जाते हैं
जिन्दगी का अंग
स्कूल के टिफिन से शुरु होकर
मिलते हैं खेल के मैदान में
कभी साथ पढाई करते
कभी लडाई झगडा करते
मिलती है इन्हे मजबूती
और बन जाते हैं सम्बल
इन्हे कभी हम कहते है दोस्त
कभी मित्र, यार, सहेली या फ्रेंड
*******************************************
रिश्ते जो मिलते है
कार्यक्षेत्र में काम के साथ
बच नही सकते इनसे
दिल मिले ना मिले
हाथ मिलते रहते हैं
मन में लाख जहर हो
पर्टियों में जाम मिलते हैं
अक्सर, नही चलते ये उम्र भर
फिर भी परेशानियां दे जाते है
कभी कभी इस भीड से ही
मिल जाते हैं हमसफर 
*******************************************
रिश्ते जो बनते हैं
नजर के इशारों से
सीधे देते हैं दस्तक,दिल पर
चैन सुकून और नींद
सब, पल भर में ले जाते हैं
देते हैं बहुत तकलीफ  
मगर दिल को भाते हैं
और बन जाते हैं
पूरी की पूरी जिन्दगी
**********************************************
रिश्ते जो मिलते हैं
समय के साथ
कभी भी कही भी
जुड जाते हैं हमसे
कभी ट्रेन में, कभी मंदिर में
कभी यूं ही घूमते फिरते
जैसे मिलते हैं 
दो फूल, दो पंक्षी या पानी
देखते ही संप्रेषित होता है
एक मौन संदेश
कुछ ही पल में
बन जाते है 
अनकहे अनजानें बेनाम 
अपरिभाषित रिश्ते
चित्रों के लिये गूगल का आभार
GreenEarth