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बुधवार, 13 जुलाई 2011

है चार दिन की जिन्दगी


है चार दिन की जिन्दगी
और करने हजारों काम है ,
फिर भी लोगों को सदा
दूजे के कामों से ही काम है .............

रूठ कर मना लो उन्हे

जो प्यार करते है तुम्हे
कल के भरोसे में तो फिर

बस उदासी भरी कई शाम है...................

जाने कितना वक्त खोया तुने
अपने पराये को समझने में

पर एक ही पल में यहाँ
मिट जाते रिश्तों के नाम हैं.....................

खुशियों को पाने के लिये हैं खोई
जिन्दगी की लाखों खुशी

है हाथ खाली आज भी मगर

ढल गयी जिन्दगी की शाम है ........................
यूँ तो सब बिकता ही है

बेजान दुनिया के बाजार में
पर खरीद पाया कौन वफा

जो कीमती मगर बेदाम है ....................


22 टिप्‍पणियां:

  1. यूँ तो सब बिकता ही है

    बेजान दुनिया के बाजार में
    पर खरीद पाया कौन वफा

    जो कीमती मगर बेदाम है ....

    बहुत सही कहा है ..सुन्दर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  2. सही कहा समय रहते समझ जाओ , अच्छी रचना

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  3. @ रूठ कर मना लो उन्हे
    जो प्यार करते है तुम्हे!

    इस दुनियां में बहुत कम लोग प्यार की समझ रखते हैं ...इसे सहेज कर रखना !
    शुभकामनायें !!

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  4. अच्छी लगी आपकी गीत नुमा रचना ...

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  5. बहुत बढ़िया लिखा है...
    अपनों के रूठने पर उन्हें मना लेना अच्छा है..इसमें पहल की राह नहीं देखनी चाहिए...

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  6. कल 17/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. ढल गयी जिन्दगी की शाम है
    यूँ तो सब बिकता ही है बेजान दुनिया के बाजार में
    पर खरीद पाया कौन वफा
    जो कीमती मगर बेदाम है
    ..........सही कहा आपने

    उत्तर देंहटाएं
  8. यथार्थमय सुन्दर पोस्ट
    कविता के साथ चित्र भी बहुत सुन्दर लगाया है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. दिल में उदासी पर आस फिर भी है बाकि एक सकारात्मक सोच :)
    बहुत सुन्दर रचना दोस्त जी |

    उत्तर देंहटाएं
  10. जाने कितना वक़्त खोया तूने अपने पराये को समझने में
    वाह!! सुंदर भाव.

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  11. जाने कितना वक्त खोया तुने
    अपने पराये को समझने में

    पर एक ही पल में यहाँ
    मिट जाते रिश्तों के नाम हैं...!

    एकदम सच्ची बात ......यहाँ सब मिट जाता है ......!

    उत्तर देंहटाएं
  12. अरे वाह आज तो कुछ दार्शनिक अंदाज में है बहना . आज में ही जीना श्रेयस्कर है , कल किसने देखा . हँसी और उदासी है जीवन में सामानांतर रेखा .

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  13. यूँ तो सब बिकता ही है

    बेजान दुनिया के बाजार में
    पर खरीद पाया कौन वफा

    जो कीमती मगर बेदाम है

    waah bahut khoob, kya sunder rachna likhio hai aapne, badhai

    उत्तर देंहटाएं
  14. सब वक़्त-वक़्त की बात है, ये ज़माना एक सा नहीं रहता
    खिजाँ भी अंग है नेचर का, समाँ सुहाना सदा नहीं रहता..
    रिश्ते दिलों के जरा सोच- के बनाना ऐ दोस्त..! क्योंकि,
    मधुर भावनाओं का खजाना, सदा एक सा नहीं रहता..,

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  15. जाने कितना वक्त खोया तुने
    अपने पराये को समझने में


    पर एक ही पल में यहाँ
    मिट जाते रिश्तों के नाम हैं.....................

    Excelent Line..Very True..

    उत्तर देंहटाएं

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