प्रशंसक

गूगल अनुसरणकर्ता

सोमवार, 13 नवंबर 2017

प्रथम प्रश्न


सबसे पहला सवाल
जो पूछ बैठते हैं
कई बार घर के सदस्य
या कोई रिश्तेदार
अबोध बच्चे से
कौन है तुम्हे प्यारा 
सबसे ज्यादा 
तुम मम्मी को करते हो
ज्यादा प्यार 
या पापा है तुमको 
सबसे प्यारे
कितना सरल लगता है
ये प्रश्न कहने सुनने में
मगर उत्तर की जटिलता का
आंकलन करना भी दुष्कर है
आखिर क्या हो आधार
ऐसे प्रश्नों के उत्तर का
भौतिक सांसारिक सुविधायें
या ममता का अगाध सागर
पिता का शाम को चाकलेट लाना
या माँ की हल्की फुल्की डांट
पिता का झूठमूठ का गुस्सा
या माँ का मैगी बना देना
बच्चा नही जानता
कि दोनो ही पहिये
मिलकर दे रहे है गति
उसके जीवन को
दोनो मिल कर ही
दे रहे हैं आकार
उसके भविष्य को
वो तो सिर्फ करने लगता है तुलना
पिछले एक दो दिन की घटनाओं का
और जाँचता है अपने स्तर पर 
किसने पूरी की कितनी फर्माइशे 
किसने कितनी बार उसे रोका
एक समीकरण सा बनाता है
जिसमें कभी कुछ जोडता है
कभी कुछ घटा देता है
नही जोड पाता वो
माँ का रातों में जागना
नही समझ पाता बाल मन
पिता का अपनी जरूरतें काटना
फिर भी, हर गणित के बाद
समीकण के दोनो तरफ
उसे बराबर ही नजर आता है
मगर प्रश्न का उत्तर तो
देना है उसे कोई एक
अपने मस्तिष्क पर
डालता है कुछ और जोर
फिर याद आती है अनायास
उसे एक ऐसी घटना
जो किसी एक पलडे को
कर देती है अचानक भारी
और बच्चा देता है उत्तर
कभी इस उत्तर में होती है माँ
कभी जवाब में होता है पिता 
यह उत्तर परिवर्तनशील है
क्योंकि बाल मन नही कर सकता
गुणा भाग
मगर डर जाते है माँ बाप
अन्दर ही अन्दर
आखिर क्यों नही दोनो
उसके लिये बराबर
अक्सर लोग करते है मनोरंजन
ऐसे अवैज्ञानिक प्रश्नों से
मगर बाल मन में जन्मती है
एक तुलना की ग्रन्थि 
जो समय के साथ 
कभी घटती नही, 
सिर्फ बढती ही है
धीरे धीरे कोई एक
हो जाता है कुछ करीब
और अपनेआप हो जाती है
दूसरे से कुछ दूरी सी
और परिणाम में 
कई बार बनती है माँ
पुल पिता पुत्र के संवाद का
सब कुछ करके भी हो जाता है
पिता कुछ पराया पराया सा

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15-11-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2789 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  2. अत्यंत प्रगल्भ रचना । पिता सब कुछ करके भी पराया पराया सा हो जाता है ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर मनोवैज्ञानिक आख्यान! बदलती फिजा में पंक्तियाँ कुछ तब्दीलियों का शिकार भी हो सकती हैं, यथा -
    धीरे धीरे कोई 'और'
    हो जाता है कुछ करीब
    और अपनेआप हो जाती है
    कुछ कामचलाऊ दूरी सी
    मम्मी और पापा दोनों से!

    उत्तर देंहटाएं

आपकी राय , आपके विचार अनमोल हैं
और लेखन को सुधारने के लिये आवश्यक

GreenEarth