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सोमवार, 27 नवंबर 2017

आई एम सॉरी


लकड़ी से सहारे
भीड़ भरी 
फुटपाथहीन सडक पर
किनारे किनारे
धीरे धीरे चलते
वृद्ध से
टकराता है
एक सत्रह अठारह साल का
मोबाइल पर वयस्त
मार्ड्न युवक
सडक के कुछ बीच
जा गिरती है
लाठी
बिखर जाती है
दूसरे हाथ में
मजबूती से पकडी
कुछ दवाइयां
लडखडा जाते है पैर
युवक हल्का सा रुकता है
उतारता है
रेबन के सन ग्लास
कट करता है कॉल
कानों से निकलता है
इयरफोन
झुक कर देखता है
रीबोक की जींस पर
शायद पड गये दवा के दाग
तभी याद आता है उसे
अपना कर्तव्य
या क्लास की शिक्षा
देखता है वृद्ध की ओर
बोलता है
आई एम सॉरी
संतुष्ट भाव से
कानों पर लगा इयर फोन
चल देता है
वृद्ध
करता है कोशिश
उठने की
कुछ संभल कर
उठाता है गिर गयी लाठी,
जो फंस गयी है
आती जाती कारों और बाइक के बीच
समेटता है 
बिखरी दवाइयां
और मुड़ जाता है वापस
अपनी नियत चाल से कुछ तेज
वही सडक पर छोडकर 
भावहीन सॉरी

7 टिप्‍पणियां:

  1. कई तो सॉरी भी नहीं बोलते
    मर्मस्पर्शी रचना

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  2. We should responsible for other's, sorry isn't enough.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (29-11-2017) को "कहलाना प्रणवीर" (चर्चा अंक-2802) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. आप सभी सुधीजनों को "एकलव्य" का प्रणाम व अभिनन्दन। आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार(दिनांक ०३ दिसंबर २०१७ ) तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com
    हमारा प्रयास आपको एक उचित मंच उपलब्ध कराना !
    तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

    उत्तर देंहटाएं

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