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गुरुवार, 11 नवंबर 2010

खूबसूरत साजिश


सुहासिनी अस्पताल जा चुकी थी, मै भी आफिस जाने के लिये तैयार हो रहा था कि मुझे चक्कर आने लगा । इधर काफी दिनों से थोडा सा भी काम करने से ऐसा हो रहा था । सुहसिनी मुझे कुछ दवाइयां दे देती थी ।सोचा कि सुहासिनी के मेडिकल रूम से वो दवा ले लेता हूँ । दवाई की दराज खोलते ही मुझे मेरी मेडिकल रिपोर्ट दिखाई दी , मुझे कैंसर था । रिपोर्ट पढते पढते मेरी नजर वही रक्खी सुहासिनी की डायरी पर पडी । डायरी पर लिखे शब्दों ने तो मेरे चारो तरफ अंधेरा सा कर दिया था । सुहासिनी शादी से पहले जानती थी कि मुझे कैंसर है ,और मेरी उम्र बहुत कम ही बची थी । और इसीलिये उसने मुझसे शादी की थी कि मेरे जाने के बाद मेरी सारी दौलत और जायजाद उसकी हो जायगी । और ये सब केवल उसकी अपनी  सोच नही थी , इस साजिश में मेरा वो दोस्त शामिल था जो तब से मेरे साथ था जब से मैने दुनिया को जानना शुरु किया था । उन दोनो को सिर्फ उस दिन का इन्तजार था मेरी मृत्यु का । मेरी जाते ही उनको अपना घर बसाना था । 
                                                      एक तरफ शशांक जिस पर मै खुद से ज्यादा भरोसा था और दूसरी तरफ थी सुहासिनी जिसे मैने जिन्दगी माना था , उन दोनो ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया मुझे समझ नही आ रहा था । मै एक बिखरे पत्ते की तरह जमीन पर गिर पडा । तभी मुझे एक आवाज सुनाई दी । उन दोनो ने तुम्हारे साथ छल नही किया , तुमको तो जिन्दगी दी है , आखिर रक्त कैंसर तुमको कितने दिन की जिन्दगी देता साल या दो साल । मरना तो तय ही था ना । बचपन मे माँ और पिता जी को खोने के बाद  इस पैसे के सिवा मेरे पास था ही क्या ? प्यार क्या होता है ये तो मैने सुहासिनी से ही जाना था ,शशांक ने हमेशा हर मुश्किल में मेरा साथ निभाया । और अगर यह सच भी हो कि दोनो ने तुम्हारे खिलाफ कोई साजिश तुम्हारी दौलत पाने के लिये की थी तो भी जाते जाते मुझे वो हर खुशी दी थी जिसके लिये मै तरसता था । फिर दौलत तो मेरे जाने के बाद किसी ना किसी को तो मिलती ही । ये आवाज मेरे मन की ही थी । अब मेरे मन में कोई शोक नही था । मैने एक बार फिर से डायरी में लिखे शब्द पढे " शशांक मुझे मालूम है कि तुम मुझे प्यार करते हो लेकिन आकाश अब कुछ ही दिन का मेहमान है , इसलिये मै आकाश से शादी कर रही हूँ मै खुश हूँ कि ये केवल मेरा नही हमारा निर्णय है ,आखिर कुछ ही दिनों की बात है  " मै खुश था कि मेरे दोस्त और पत्नी ने मेरे खिलाफ इतनी खूबसूरत साजिश की थी । अब मै खुशी से मरने के लिये और बाकी बची जिन्दगी खुशी से जीने के लिये तैयार था ।

21 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति के लिए साधुवाद .

    ग्राम-चौपाल - कम्प्यूटर में हाईटेक पटाखे

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  2. मर्मस्पर्शी रचना, बहुत सुंदर ...

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  3. खुशी के अपने मायने होते है आपकी ये रचना कुछ प्रश्न भी उठाती है जैसे किसी की प्रसन्नता दूसरो के बलिदान पर आधारित है. बहरहाल एक धुंध के सरीखी रचना
    आधुनिक बलिदान

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  4. अपनी अपनी जगह से सच को देखने का एक खूबसूरत पक्ष

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  5. मार्मिक कहानी
    ये हमें सोचने पर मजबूर करती है की हमारी वास्तविक जरुरत क्या है .

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  6. मर्मस्पर्शी ...अपनी अपनी जगह सब सच्चे लग रहे हैं ..

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  7. bahut khoobsurat pahlu darshaya hai ......... this lets everyone think its all about the perspective how we think the things .... same thing may give you happiness and same can give you sadness ........ kuch sawal bhi uthate hain ..... jaise ki daulat hone ke baad bhi bina dost aur wife ke uske paas koi khushi nahin thi ........ shayad wo khud daulat ko apni khushi ke liye laga sakta tha apni pasand ki shaadi kar sakta tha ..... apne pasand ke dost bana sakta tha aur apni daulat un sab ke saath khushi se baant saktha tha ....... agar aisa nahin hua to kya harz hai agar kisi aur ne use khushi di usi ki daulat ke liye ....... shayad sirf intention hai jo humein khushi ya dukh deta hai ...... act same rahta hai ...... agar use laga ki unhone uski khushi bhi chahi daulat ke saath that makes him feel satisfied rather than if he thinks its only cheating ..... though the act whatever friend and wife did is same in both the cases.

    Congrats Didi for unique story of its kind showing lot of aspects and give food for thought. :-)

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  8. मन को छूने वाले मार्मिक भावों की कथा

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  9. अपर्णा जी

    मुझे कहानी में कही भी कोई मार्मिक बात नहीं लगी जैसा की सभी कह रहे है | कहानी एक नई सोच एक अच्छी सकारात्मक दिशा की बात कर रही है जो मुझे बहुत ही अच्छी लगी निश्चित रूप से ये सोच आप की है जो सराहने के काबिल है | जब बात खुद के जीवन की हो ख़ुशी को हो तो हमें हर नकारात्मक चीज से भी अपने लिए सकारात्मक बात निकाल लेनी चाहिए जीवन को खुशहाल और तनाव रहित बनने का मूल मंत्र यही है | एक अच्छी कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद |

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  10. एक अच्छी कहानी पढाने के लिए धन्यवाद |

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  11. खुबसूरत साजिश कहानी का मुख वाक्य ही बहुत कुछ बया करता है फिर इतनी अच्छी रचना दिल को छूने वाली मृत्यु की शैया पर बैठा व्यक्ति भी ऐसा सोच सकता है आपने बहुत ही सधे अंदाज में इसे प्रस्तुत किया है !

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  12. मार्मिक, आज के युग की सच्चाई। अच्छी लगी लघुकथा। धन्यवाद।

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  13. कहानी में नयापन है, अच्छा लगा !

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  14. एक अच्छी कहानी पढाने के लिए धन्यवाद |

    ek gahri soch.

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  15. इतनी ख़ूबसूरत साजिश पढ़ कर अच्छा लगा

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