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मंगलवार, 16 नवंबर 2010

एक ब्लाग इंसानियत के नाम

पिछले कुछ दिनों में हम कुछ ऐसे ब्लाग्स पर गये जहाँ किसी एक धर्म विशेष ने अपने को महान और सर्वश्रेष्ठ बताया । महान बताना कोई गलत बात नही , मगर बाकी दूसरों को गलत या कम बता कर अपने को अच्छा बताना , ये किसी बुद्धमत्ता का सूचक नही ।
मुझे तो ऐसा लगा जैसे ब्लाग जगत पर कोई धर्म युद्ध सा चल रहा है । टिप्पणी का उपयोग एक दूसरे पर छींटाकसी के लिये हुआ । शायद यह तो ब्लागिंग का उद्देश्य नही होना चाहिये । कम से कम कोई तो जगह बची रहनी चाहिये जो वैचारिक प्रदूषण से मुक्त हो । और अगर हमें किसी धर्म की बात करनी ही है तो फिर हमें एक ऐसा धर्म चुनना होगा जो वैश्विक है - इंसानियत का धर्म । और मुझे लगता है कि किसी को मेरी इस बात से असहमति नही होगी कि इंसानियत का धर्म सर्वश्रेष्ठ नही  । हम सभी का यह कर्तव्य होना चाहिये कि हम कुछ ऐसा लिखे जिससे जो लोग भी इससे विमुख हो रहे है उन्हे सही मायने में एक सत्य मार्ग मिले । क्यों कि

बुरा कोई मजहब नही , बुरा नही कोई धर्म ,
अगर कुछ सुधारना है तो वो हैं बुरे हमारे कर्म ॥
समझ सको तो समझ लो वेद कुरान का मर्म ,
ना करो ऐसा काम के इंसानियत को आये शर्म ॥

39 टिप्‍पणियां:

  1. aapse purntaya sahmat

    humesha saaf-suthri bloging honi chahiye,

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

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  2. इंसानिअत ही सर्वश्रेष्ट धर्म है|

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  3. इंसानिअत ही सर्वश्रेष्ट धर्म है|
    I AGREE PATALI THE VILLAGE

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  4. आप हमारी पोस्ट पर आयी हमारी विरह वेदना पढ़ी..

    हमारी पीठ थपथपायी, हमारे दर्द को मरहम मिल गया ..

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  5. आप हमारी पोस्ट पर आयी हमारी विरह वेदना पढ़ी..

    हमारी पीठ थपथपायी, हमारे दर्द को मरहम मिल गया ..

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  6. "बुरा कोई मजहब नही , बुरा नही कोई धर्म ,
    अगर कुछ सुधारना है तो वो हैं बुरे हमारे कर्म ॥
    समझ सको तो समझ लो वेद कुरान का मर्म ,
    ना करो ऐसा काम के इंसानियत को आये शर्म"

    इंसानियत का सन्देश देती हुई आपकी ये पंक्तियाँ प्रशंसा की हक़दार हैं और इसकी रचयिता होने के नाते आप बधाई की हक़दार.

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  7. सोचा कि सबसे पहले आपका फ़ौलोवर ही बना जी फ़िर इंसानियत को अनुसरण करते रहेंगे जीवन भर । इसकी बहुत जरूरत थी । पलाश जी , बहुत बहुत शुक्रिया और शुभकामनाएं

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  8. अपने धर्म में ही इतनी खूबियाँ है की किसी किसी दूसरे के बारे में लिखने की जरुरत ही नही परन्तु जब कोई अपने को श्रेष्ठ और दूसरो को हेय बताता है तो आईना दिखाना ही पड़ता है .
    जिस प्रकार अपराधी से अपराध सहने वाला अधिक दोषी है उसी प्रकार गलत बात पर चुप रहने वाला भी अधिक दोषी है .
    धर्मनिरपेक्ष होना अच्छी बात है परन्तु समझौतावादी और अवसरवादी हो कर नही और आज ऐसे ही लोग ज्यादा है .
    अच्छी पोस्ट के लिए आप का बहुत बहुत आभार

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  9. सही कहा…………मगर मानते कितने लोग हैं?

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  10. धर्मान्धता मनुष्य को केवल एक अँधेरे कुंवे की तरफ ले जाती है , इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है. विचारणीय आलेख एवं

    http://ashishkriti.blogspot.com/

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  11. अपसे बिलकुल सहमत हूँ----
    इंसानिअत ही सर्वश्रेष्ट धर्म है|
    सार्थक सन्देश। धन्यवाद।

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  12. अपर्णा जी

    आप एक ब्लॉग पर गई है ब्लॉग जगत में ऐसे कई ब्लॉग है | मै भी जब ब्लॉग जगत में आई थी तो ये सब देख कर हैरान हो गई थी पर धीरे धीरे समझ में आने लगा की ये इसी मकसद से ही ब्लॉग लिखते है हम इनका कुछ नहीं कर सकते है तो उन ब्लॉग को पढ़ना ही छोड़ दिया | और इस तरह के ब्लॉग सिर्फ एक ही धर्म के नहीं है दोनों ही धर्म के है दोनों का काम बस एक दूसरे के धर्म और धर्म ग्रन्थ में कमी निकलना है | ऐसे ब्लॉग पर जाना छोड़ दीजिये येसुधरने वाले नहीं है |

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  13. पलाश जी,

    स्पष्ठ है मानव का धर्म, सार्थक पोस्ट!! आभार

    बुरा कोई मजहब नही , बुरा नही कोई धर्म ,
    अगर कुछ सुधारना है तो वो हैं बुरे हमारे कर्म ॥
    समझ सको तो समझ लो वेद कुरान का मर्म ,
    ना करो ऐसा काम के इंसानियत को आये शर्म ॥

    बेहद सुंदर!!

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  14. किसी नासमझ को तो समझाया भी जा सकता है...लेकिन जो जानते-बूझते भी नासमझी भरे, मूर्खतापूर्ण कार्यों को अन्जाम देने में जुटे हों---और इस पर भी खुद में विद्वान होने का भ्रम पाले बैठे हों--तो उन्हे भला कोई कैसे समझा सकता है. उन्हे तो सिर्फ वक्त ही समझाएगा..लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी.

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  15. अच्छे विचार हैं जी आपके.

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  16. इंसानियत का धर्म सर्वश्रेष्ठ

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  17. सब धर्म यही सिखाएं कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और जो ईमानदार , कर्मनिष्ठ है वो इस समाज और देश और धर्म की सच्चे सेवा कर रहा है

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  18. पलाश जी अपना तो ये मानना है की एक ब्लॉग नहीं बल्कि पूरी दुनिया ही इंसानियत के नाम पर चलनी चाहिए. पर ऐसा है नहीं. इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं जिनके लिए प्यार मोहब्बत इंसानियत भाईचारा और सारी दूसरी बातें अपने धर्म के आगे कमतर दिखती हैं. वे सैकड़ों वर्ष पहले लिखी गयी एक पुस्तक में लिखे एक एक अक्षर के अनुसार जीवन जीने की चाह रखते हैं और इससे बाहर जाने वाले पर फतवा पढ़ देते हैं. ये ही लोग सारी दुनिया को अपने रंग में रंगना चाहते हैं जो मुझे पसंद नहीं और जिसका मैं तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार जीवन भर विरोध करते रहूँगा.

    हाँ अगर वे खुद को दूसरों से बेहतर होने का बखान ना करें और सारी दुनिया पर अपने धर्म का झंडा फहराने का इरादा छोड़ दें तो अपन को उनसे कोई मतलब नहीं.

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  19. जिस धर्म विशेष की आप बात कर रहीं हैं उसमें अक्सर ये बातें कहीं जाती हैं और बचपन से ये दिमाग भर दी जाती है................और जो बात एक बच्चे के दिमाग में बिठा दी जाए उसे निकालना बहुत कठिन है......हम तो बस यही कह सकते हैं की ऐसे ब्लोग्स पर न जाएँ, और अगर जाएँ तो चुपचाप बिना कुछ कहे वापिस आ जाएँ..............वैसे ऐसे ब्लॉग के followers इक्का दुक्का ही होते हैं, जिससे पता चलता है की उनकी बातें कितनी पसंद की जाती हैं.

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  20. समझ सको तो समझ लो वेद कुरान का मर्म ,
    ना करो ऐसा काम के इंसानियत को आये शर्म ॥
    ... bahut sundar ... behatreen !!!

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  21. बहुत सार्थक लेख है...सभी जान बूझ कर गलती करें तो क्या किया जा सकता है. अंतिम दोहा बहुत अच्छा लगा.

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  22. अपनी श्रद्धा को दूसरों की मान्यताओं से बड़ा बताना मानवता के प्रति अपराध है ! दूसरों की आस्थाओं का मज़ाक उड़ाते यह लोग, समाज की नसों में धीरे धीरे जहर घोल रहे हैं ! ऐसे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए ! यह हमारी मान्यताओं के प्रति ही नहीं आने वाली पीढ़ी के लिए भी गुनाहगार हैं, समय इनको सबक जरूर देगा ! इनकी चर्चा न करें तभी बेहतर होगा !
    आपने ब्लागर्स मिलन में शामिल होने की इच्छा प्रकट की है ! अगर आप शामिल होना चाहती हैं तो अपना संपर्क पता दें !
    हार्दिक शुभकामनायें !

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  23. पलास जी आप की बाते बहुत सही है, लेकिन कुछ लोगो की आँखों में धर्म मजहब का चश्मा चढ़ा है!इसी सन्दर्भ में गुरुनानक देव जी की वाणी का उल्लेख करना चाहूँगा !
    अव्वल अल्ला नूर उपाया
    कुदरत के सब बन्दे
    एक नूर ते सब जग
    उपज्या कौन भले कौन मंदे !!

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  24. इंसानियत खुद सबसे बड़ा धर्म है....

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  25. Sarthak post.Insaniyat ko murt roop dena sabse bada dharm hai. Nice post.Insaniyat ko thik se samajhne ke liye main aapko apne blog par amantrit karata hun. Dhanyavad

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  26. आप सभी के विचार जान कर बहुत खुशी हुयी । साथ ही साथ सन्तोष भी हुआ कि जब तक आप सब लोग ब्लाग की दुनिया में है ,कोई भी वैचारिक प्रदूषण फैलाने में कामयाब नही हो पायेगा ।

    ना तीर से ना तलवार से
    ना छूरी से ना कटार से ।
    नासमझों को समझा लेंगें
    शब्दों के मधुर वार से ॥

    आप सभी का हार्दिक आभार

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  27. कुछ फूलों की बाते हो कुछ प्यार की बाते हो
    कुछ तितली की बाते हो कुछ मनुहार की बाते हो

    ज्ञान की बाते हो कुछ विज्ञान की बाते हो
    हँसी ख़ुशी की बाते हो कुछ मुस्कान की बाते हो

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  28. कौन सुनता है अच्छी बातों को... सिर्फ किताबों तक सीमित हैं..

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  29. बहुत सही...
    बुरा जो देखन मैं चला बुरा ना मिलिया कोय
    जो दिल देखा आपना मुझ सा बुरा ना कोय.
    http://swarnakshar.blogspot.com/
    राजेश

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  30. kya baat hai aapki aakhiri ki 4 panktiyaan mujhe boht jyada pasand aaye....!!!

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  31. यहाँ पर श्री गुरु नानक देव जी कि इस पंक्ति को उद्धृत करना भी उचित रहेगा कि मंदा जाने आपको अवर भला संसार. अर्थात स्वयं को यदि बुरा समझो तो सारा संसार भला दिखाई देता है.

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  32. You are so right..........i had written about hinduism in the same pattern........

    http://sachinjain7882.blogspot.com/2008/10/blog-post_11.html

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  33. ye charo line to aisa lagta hai ki charo vedeo ko sar bata rahi ho. bahut hi sunder lines hai lagta hai mann ki gahrai likhi gayii hai.

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  34. आपका कहना बिलकुल सही है.सभी को अपने विचार व्यक्त करने देना चहिये,परस्पर उलझना नहीं चाहिए.मतभेद तो उपासना पद्धति का है.धर्म तो वही है जो धारण करे.
    भगवान(भ =भूमि ,ग =गगन ,व् =वायु ,/=अनल =अग्नि ,न =नीर =जल )
    G O D (जेनेरेटर ,आपरेटर ,डेसट्रायर )
    खुदा =उपरोक्त ५ तत्व जो खुद ही बने हैं,जिन्हें किसी ने बनाया नहीं है.वे ही सृजन ,पालन ,संहार करते हैं.मतभेद कहाँ है ?पर है -लोगों के दिमागों में.यदि दिमाग साफ़ हों तो कोई झगरा ही नहीं होगा.

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