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गुरुवार, 15 जुलाई 2010

भूख बडी या नींद










इंसा सोए बिना रह सकता या
भूखे पेट वो सो सकता है
हम आज तलक ना जान सके कि
भूख बडी या नींद
रोटी और नींद दोनो में
किसकी कीमत है ज्यादा
या रात दिवस के जैसे
जीवन नही हो सकता पूरा
गरीब बिना रोटी है मरता
धन वाले तरसते सोने को
कोई कर्ज ले खाने को
कोई दान चढाये सोने को
कभी सूखी रोटी से भी
त्रप्त आत्मा हो जाये
कभी कीमती मेवे भी
एक पेट ना भर पाये
इक टूटी सी खाट कभी
स्वप्न लोक की सैर कराये
कभी रेशमी मखमल भी
दो पल का ना चैन दे पाये
मिल जुल कर चाहे गर हम तो
सभी खाये और सोये जग में
भूखो को दे खाने को और
ले उनसे दुआयें चैन से सोयें

5 टिप्‍पणियां:

  1. कल 07/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. भूखो को दे खाने को और
    ले उनसे दुआयें चैन से सोयें
    बहुत खूब.....

    www.poeticprakash.com

    उत्तर देंहटाएं

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