प्रशंसक

मंगलवार, 12 अक्तूबर 2010

ये भी किया जाय


फूलों से इश्क तो बहुत किया
अब काँटों से मोहब्बत की जाय ।
चाँदनी रात के आँचल में
सूरज की चाहत की जाय ॥

अल्लाह के सच्चे बन्दों की भी
कुछ देर इबादत की जाय ।
औरों को तो कह लिया बहुत
अब खुद से खुद की शिकायत की जाय ॥

जो कुछ पल की राहत दें
कुछ ऐसी शरारत की जाय ।
जैसी आजाद भगत ने की
वैसी एक और बगावत की जाय ॥

दुनियादारी की अदालत में
कुछ हंसी गुनाहों की वकालत की जाय |
बहुत हुआ जाना इतिहास की गलियों में
ऐतिहासिक बन जाने  की हिमाकत की जाय ||

फूलों से इश्क तो बहुत किया
अब काँटों से मोहब्बत की जाय ……………

3 टिप्‍पणियां:

  1. जो कुछ पल की राहत दें
    कुछ ऐसी शरारत की जाय ।
    जैसी आजाद भगत ने की
    वैसी एक और बगावत की जाय ॥

    वाह .....बहुत खूब.....!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी राय , आपके विचार अनमोल हैं
और लेखन को सुधारने के लिये आवश्यक

GreenEarth