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गुरुवार, 28 अक्तूबर 2010

मुकद्दर की हकीकत


लाख हम चाहे हर सपना ,हकीकत बनता नही ।
जो मुकद्दर में न हो ,वो हासिल होता नही ॥

हालात कभी किसी के ,एक से रहते नही ।
कौन सा जख्म है , जिसकी दवा वक्त होता नही ।।

जिन्दगी में सिर्फ सुख मिलें, ये मुमकिन होता नही
अश्क के आये बिना तो ,खु्शियां भी पूरी होती नही ।।

जो मिला है हमें , वो भी कम तो नही ।
क्यों गिने वो जो , हाथ में आया ही नही ॥

अक्सर जो सोचते हैं, वो पूरा होता नही ।
और जो देता है खुदा, उसे हम सोच पाते ही नही ॥

माना मुड के देखने से वक्त को , मुकदर बनता नही
मगर मुकद्दर बनाने की खातिर बीता वक्त भूलना  कभी नही

18 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरत अहसासों को पिरोती हुई एक सुंदर भावप्रवण रचना. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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  2. zindgi ki hakikat ko bayan karti ek sunder rachna. dhanyabad.

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  3. गहरी बात कह दी आपने। नज़र आती हुये पर भी यकीं नहीं आता।

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  4. हालात कभी किसी के ,एक से रहते नही ।
    कौन सा जख्म है , जिसकी दवा वक्त होता नही ।।
    sach baat poora jeevan darshan hai ..

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  5. @-जो मिला है हमें , वो भी कम तो नही ।
    क्यों गिने वो जो , हाथ में आया ही नही...

    ------------

    अपर्णा जी ,

    आपने बहुत बड़ी सच्चाई को अपनी कविता में लिखा है। मैं खुश हूँ की आपके कारण आज इस ब्लॉग पर आने का मौका मिला और सच से भरी इस सुन्दर रचना को पढने का मौका मिला ।

    हर एक के जीवन में कुछ ख्वाब होते हैं , जो पूरे नहीं होते। इंसान कोशिश करता है उसे भुला कर दूसरी खुशियों को तलाश उसी में सुखी रहने की।

    लेकिन , सच कहूँ, कुछ दुःख पूरी उम्र मन को सालते रहते हैं। भुलाए नहीं भूलते। हर कोई समझ नहीं पाता, क्यूंकि शायद समझना नहीं चाहता । लेकिन कभी-कभी कोई अनजान सा व्यक्ति अचानक आकर मन को हौले से सहला जाता है। आज आपके साथ वो ही अनजाना सा स्नेहिल रिश्ता बन गया है।

    आपका आभार इस सुन्दर कविता के लिए।

    .

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  6. अक्सर जो सोचते हैं, वो पूरा होता नही ।
    और जो देता है खुदा, उसे हम सोच पाते ही नही ॥
    jo mil gaya usi ko mukddaar samajh liya .

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  7. bahut pyari kavita... jo life aur hamare adjustments ko completely darshatee hai... abhaar...

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  8. गहरी बात.... जिंदगी इम्तिहान लेती और हमें उससे होकर गुजरना ही पड़ता है

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  9. माना मुड के देखने से वक्त को , मुकदर बनता नही
    मगर मुकद्दर बनाने की खातिर बीता वक्त भूलना कभी नही

    सच्चाई बयाँ करती रचना ...समय से पहले और भाग्य से अधिक कुछ नहीं मिलता

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  10. कौन सा जख्म है , जिसकी दवा वक्त होता नही ।।
    ....

    मगर मुकद्दर बनाने की खातिर बीता वक्त भूलना कभी नही
    ....

    सही है ,लाइफ के फंडे हैं ये तो

    बेहद सुन्दर ढंग से शब्दों में बांधे हैं आपने

    आभार

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  11. लाख हम चाहे हर सपना ,हकीकत बनता नही ।
    जो मुकद्दर में न हो ,वो हासिल होता नही ॥
    is rachna ko vatvriksh ke liye bhejen .... rasprabha@gmail.com per parichay aur tasweer ke saath

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  12. बहुत बढ़िया !!
    किसी ने सही कहा है :-
    हर किसी को हर मुकाम नहीं मिलता |
    किसी को जमीं तो किसी को आसमां नहीं मिलता ||

    मेरे लेख पर टिप्पणी लिखने के लिए धन्यवाद !! हाँ बात छोटी ही सही पर बुरे वक़्त पर मरहम से कम असर नहीं करेगी | :) :)

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  13. kya baat hai nanadraani mujhe maloom na tha ki mai kaviyo ke kunbe me pahuch gayee.
    vaise sher bahut achchhe mare hai

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  14. रश्मि जी मेरी रचना के पत्ते को वट्वृक्ष की शाखा में संकलित करने के लिये आभार

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  15. I feel proud my didi

    "अश्क के आये बिना तो ,खु्शियां भी पूरी होती नही ।।" sahi likha hai :-)

    Pata hai ek acchi baat aur batata hoon ....... kavitayein to acchi hain hi no doubt about that ..... acchi baat ye hai ki padhne wale aur tippani karne wale ...... sarahne wale aur uski gahrayi ko samajhne wale log bhi kaafi dikh rahe hain

    Logon ke saath ......... "कोई अनजान सा व्यक्ति अचानक आकर मन को हौले से सहला जाता है। आज आपके साथ वो ही अनजाना सा स्नेहिल रिश्ता बन गया है।" aisa rishta banne ke liye bahut bahut badhayi :-)

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