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शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

एक भूली बिसरी याद

कल मै अपनी माँ को अपना एक ब्लाग पढ कर सुना रही थी , तभी उनको अपनी लिखी एक रचना जो उन्होने आज से करीब चालीस साल पहले लिखी थी , आधी अधूरी सी याद आयी । और बहुत कोशिश के बाद उनको वो थोडी सी याद आयी और थोडी उन्होने कल लिखी । ये मेरा सौभाग्य है कि हम अपनी माँ की भूली बिसरी गजल को अपने ब्लाग पर लिख रहे है  ..........

मालिक ने बनाया इंसा को
इंसा ने उसे मजबूर किया |
जब जी चाहा मचला कुचला
जब जी चाहा तब प्यार किया ||

जीने की तमन्ना हर दिल में
हर दिल में गुजारिश होती है |
जीवन के थपेडों को सह कर
मोहब्बत की ख्वाइश होती है ||
मालिक ने .................................

कहने को वफायें करते है
कुछ पाने को मैखानों में |
परदे के पीछे तो कुछ है
जानो उसको अनजानों में ||
मालिक ने.............................

पर सत्य कहे तो जीवन में
हर  पल है एक खजाने मे |
चाहो तो उसे बर्बाद करो
चाहे रखो तहखाने में ||
मालिक ने ............................

इक सीख हमारी भी सुन लो
जीवन को सजाओ सपनों में |
सपनों को फिर साकार करो
तुम सफल रहोगे इस जीवन में ||
मालिक ने ..................

20 टिप्‍पणियां:

  1. माँ से कहिएगा की उनकी सीख सर माथे पर

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  2. पर सत्य कहे तो जीवन में
    हर पल है एक खजाने मे |
    चाहो तो उसे बर्बाद करो
    चाहे रखो तहखाने में ||
    मालिक ने .......
    dil me rakhne layak seekh

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  3. बहुत उम्दा रचना रही माता जी की. हमारा प्रणाम कह दिजियेगा.

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  4. बहुत अच्छी रचना| माता जी को नमन|

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  5. कहने को वफायें करते है
    कुछ पाने को मैखानों में |
    परदे के पीछे तो कुछ है
    जानो उसको अनजानों में ||
    बहुत अच्छी रचना है माता जी की। सीख देती। उनको प्रणाम।

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  6. बहुत अच्छी प्रेरक रचना है माता जी की।

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  7. ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.

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  8. अच्छा संदेश देती सार्थक रचना ।

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  9. सुन्दर सीख देता हुआ गीत , माँ को नमन

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  10. गजल पढने तथा सराहने के लिये आप सभी का आभार ।

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  12. अच्छी भाव प्रवण एवं सुघड़ सन्देश देती हुई रचना . माताजी को प्रणाम एवं आभार उनका . मै अभिभूत हूँ कि हमारे शहर में बहुत सारे कवि ह्रदय लोग रहते है .

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  13. Aunty ki seekh sir aanko par!!

    sapno ko bunane ki, aur usko sakar karne ki koshish jaari hai...:)


    bahut pyari rachna!!

    ab barabar aaunga!!

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  14. बहुत-बहुत-बहुत प्यारी-गहरी और संवेदनशील कविता है अर्पणा,आपकी माँ शायद खुद भी ऐसी ही हों.....इस कविता की भांति.....है न अर्पणा ....!!

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  15. आया है मुझे फिर याद वो जालिम गुज़रा ज़माना बचपन का ............

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  16. बहुत अच्छी रचना है आपके माँ की .........अच्छा लगा रोमांचित भी हुई ...आप खुशनसीब है .....आपके पास माँ है आपके लेखन को पढने ,सुधारने सवारने के लिए....

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  17. जीने की तमन्ना हर दिल में
    हर दिल में गुजारिश होती है |
    जीवन के थपेडों को सह कर
    मोहब्बत की ख्वाइश होती है ||

    bahut bhavuk n sundar lines

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत ही प्रेरणादायीदायी रचना. इसी बहाने आपकी माँ जी के व्यक्तित्व से भी पहचान हुई... आभार

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