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गुरुवार, 27 जुलाई 2017

लघुकथाः तो अब देख लेंगे।


क्लास में सभी बच्चे और टीचर भी यह जानते थे कि अंजली की आर्ट बहुत खराब है। एक दिन क्लास में टीचर ने सभी बच्चों से अपने मन की कोई भी ड्रांइग बनाने को कहा। अंजली भी बहुत मन से अपनी कॉपी पर ड्रांइग बनाने लगी। अंजली बहुत मन से ड्रांइग बना रही थी, उत्सुकतावश टीचर उसकी सीट तक ये देखने गयीं कि वो क्या बना रही है। अंजली ने कॉपी पर कुछ आढी तिरछी लाइने बना रखी थी ये देख टीचर ने उससे हतोत्सहित करने के भाव से पूंछा- ये क्या बना रही हो, अंजली ने बडी सरलता से कहा- भगवान। तब टीचर ने ऊंची आवाज में उसका मजाक बनाते हुये कहा- मगर भगवान को तो अभी तक किसी ने भी देखा नही, फिर उनका ड्रांइग कैसे बनाओगी?

अंजली ने बडी मासूमियत से उत्तर दिया- तो अब देख लेंगें। 

4 टिप्‍पणियां:

  1. सच, तभी तो कहा है कि बच्चे मन के सच्चे !

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  2. सुन्दर कृति। मासूम मन के भावों बहुत खूबसूरत तरीके से दर्शाया है।

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (29-07-2017) को "तरीक़े तलाश रहा हूँ" (चर्चा अंक 2681) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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